पेज

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

बुधवार, 30 जुलाई 2008

कश्ती

तूफानों को सीने में दबाये रहते हैं
हर पल भंवर में फंसे रहते हैं
आदत सी हो गई है अब तो
डूब डूब कर पार उतरने की
यह कश्ती है जज्बातों की
आंसुओं का अथाह सागर है
भावनाओं के तूफानों में
कश्ती जिंदगी की बार बार
तूफानों से लड़ते हुए
कभी भंवर में फंसते हुए
तो कभी बाहर नीकलते हुए
साहील तक पहुँचती है

मंगलवार, 29 जुलाई 2008

तड़प

जिंदगी कहाँ तडपाती है यह तो ख़ुद तड़पती है
इसे कोई क्या समझेगा यह तो ख़ुद नासमझ है
जिंदगी हमें रुलाती नही यह तो ख़ुद रोती है
इसे कोई क्या जलाएगा यह तो ख़ुद को जलाती है
इसे कोई दर्द देगा क्या यह तो ख़ुद दर्द में जीती है
जिंदगी खामोश करती नही यह तो ख़ुद खामोश होती है
यह इम्तिहान लेगी क्या यह तो ख़ुद इम्तिहान देती है
इससे मोहब्बत कोई क्या करेगा यह तो ख़ुद मोहब्बत की मारी है
जिंदगी किसी को क्या कहेगी यह तो ख़ुद बेजुबान होती है
इसे कोई क्या समझेगा यह तो ख़ुद नासमझ है

एक कतरा खुशी

खुशी मिलती है कभी कभी
समेट लो दामन में हर पल
कल न जाने क्या हो
यहाँ पल की ख़बर नही
एक छोटा सा कतरा खुशी का
जीने का सबब बन जाता है
ज्यादा की तमन्ना में
न मायूस करो इनको
यह हाथ में आती हैं कभी कभी
इसे यादों में जज्ब कर लो

गुरुवार, 24 जुलाई 2008

सिसकते ज़ख्म

कभी कभी ऐसा भी होता है
हर ज़ख्म सि्सक रहा होता है
दवा भी मालूम होती है
मगर इलाज ही नही होता है
हर जख्म के साथ कोई याद होती है
एक दर्द होता है ,एक अहसास होता है
मगर फिर भी वो लाइलाज होता है
तन्हाइयाँ कहाँ तक ज़ख्मों का इलाज करें
इन्हें तो आदत पड़ गई है दर्द में जीने की
रोज ज़ख्मों को उधेड़ना और फिर सीना
नासूर बना देता है उन ज़ख्मों को
और नासूर कभी भरा नही करते
इनका इलाज कहीं हुआ नही करता

ख्याल

आज ख्यालों से नीकलकर ख्यालों ने मुझसे बात की
हर जज्बे को बयां किया हर हाल की बात की
कुच्छ अपनी सुनाई कुछ हमारी सुनी
अपनी खामोशियों को दिखाया अपने दर्द को दिखाया
जो जो न हम जानते थे वो भी बताया
अजब वो समां था जहाँ सिर्फ़
हम थे और हमारे ख्याल थे
ख्यालों ने हमें ख्यालों में रहने को कहा
गर कर दिया बयां तो फिर जीने को क्या रहा
इस तरह कुच्छ हमने अपने ही ख्यालों से
उनके जज्बातों को जाना
ख्यालों से ख्यालों की मुलाक़ात भी अजब थी

सोमवार, 14 जुलाई 2008

हर गम में एक खुशी छुपी है
हर रात में एक दिन छुपा है
हर शाम में एक सुबह छुपी है
हर ख्वाब में एक हकीकत छुपी है
फिर क्यूँ नही हम
उस खुशी से ,उस सुबह से ,
उस दिन से ,उस हकीकत से,
रु-बी-रु नही हो पाते
क्यूँ नही उसे खोजते
क्यूँ नही पाना चाहते
क्यूँ हमेशा दर्द के साये में
हमेशा जीना चाहते हैं ?

टूटा दिल

जब ख्वाब टूटता है तब नया ख्वाब बुनते हैं हम
जब अरमान टूटते हैं तब नए अरमान जागने लगते हैं
जब उम्मीद टूटती है तब नई उम्मीद फिर जगती है
हर बार कुच्छ न कुच्छ खोकर भी
कुच्छ न कुच्छ पाने की आशा जनमती है
मगर
जब दिल टूटता है तब ..................
न उम्मीद बचती है
न ख्वाब सजते हैं
न उम्मीद बंधती है
क्यूँकी
दिल के टूटने पर
नया दिल कहाँ से लायें ?
एक दिल लिए फिरते हैं हम
वो भी कब टूट जाता है
पता ही नही चलता

गुरुवार, 3 जुलाई 2008

इंतज़ार खुशियों का

हर सुबह इंतज़ार रहता है एक खुशी का
जब भी उठते हैं एक अनदेखी खुशी को
पाने की चाहत में इंतज़ार करते हैं
सपनो का बुनना शुरू करते हैं
ख्वाबों में जीना शुरू करते हैं
ख्यालों में पाने की तमन्ना होती है
दिल इसी अहसास में खुश रहता है
मगर,
जब शाम आती है ,
हर उम्मीद नाउम्मीदी में तब्दील होने लगती है
ख्वाब टूटना शुरू हो जाते हैं
सपने बिखरने लगते हैं
और दिल को यह समझाने लगते हैं
ऐसा भी होता है ------ऐसा भी होता है
रात होते होते एक बार फिर
एक नई सुबह का फिर से इंतज़ार करते हैं
फिर से नए ख्वाब बुनने के लिए
सपनो को पूरा करने के लिए
कुच्छ इस तरह
एक नई सुबह के इंतज़ार में
एक अनदेखी खुशी के इंतज़ार में
हम जिंदगी गुजार देते हैं