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शनिवार, 29 जनवरी 2011

अर्थ

इतना मुश्किल है क्या
हँसी का अर्थ ढूंढना
अभी तो सिर्फ एक ही
अर्थ कहा है ढूँढने को
गर रोने के अर्थ
ढूँढने पड़ते
तो शायद सदियाँ
गुजर जातीं
और तुम
रीते हाथ
वापस आ जाते
एक मुस्कान चस्पा
करके
और उस हँसी का
अर्थ तब शायद
मैं बता देती
मगर तुम
तुम तो शायद
किसी भी हँसी
का कोई अर्थ
नहीं जानते
या जान कर
अनजान बनते हो
कहीं अर्थ का
अनर्थ ना बन जाये
और कोई हँसी
तुम्हारा पर्याय
ना बन जाये

सोमवार, 24 जनवरी 2011

फिर कैसा गणतंत्र प्यारे

ये कैसा गणतंत्र है प्यारे
ये कैसा गणतंत्र ?

जो करते  घोटाले 
देश को देते  बेच
उसी को हार पहनाते हैं
देश की खातिर 
जान गंवाने वाले तो
रूखी सूखी खाते हैं
ये कैसा गणतंत्र है प्यारे
ये कैसा गणतंत्र ?


चोर- बाजारी, सीना -जोरी
कपट, छल छिद्र जो बढ़ाते हैं
ऐसे धोखेबाजों को ही 
सत्ता सिर पर बैठाती है
ईमानदार और मेहनतकश तो 
रोज़ ही मुँह की खाते हैं
ये कैसा गणतंत्र है प्यारे
ये कैसा गणतंत्र?


स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति भी
खरीदी बेची जाती है 
त्राहि- त्राहि करती जनता 
महंगाई से पिसती जाती है
हाहाकार मचा हो जहाँ
वहाँ राष्ट्रमंडल खेल कराते हैं
बची -खुची खुशियाँ भी  
खेलों की भेंट चढाते हैं 
सत्ता के लालच में जो 
भ्रष्टाचारियों से हाथ मिलाते हैं 
झूठे सच्चे वादों से 
जनता को लूटे जाते हैं 
भ्रष्टाचारी को ताज पहनाकर
अपनी शान बढ़ाते हैं 
मगर गणतंत्र देने वालों
को ही ह्रदय से भूल जाते हैं
फिर कैसा गणतंत्र प्यारे 
फिर कैसा गणतंत्र ?


सरहद पर जवान शहीद हुए जाते हैं 
मगर पडोसी को न मुंहतोड़ जवाब दे पाते हैं 
बस उसी को मुख्य अतिथि बनाते हैं 
जो पडोसी को शह देता है 
आतंकवाद के दंश से सुलगते 
देश को न बचा पाते हैं 
ईंट का जवाब पहाड़ से न दे पाते हैं 
फिर कैसा गणतंत्र प्यारे 
फिर कैसा गणतंत्र ?


शनिवार, 22 जनवरी 2011

एक जरूरी सूचना ...........

 एक जरूरी सूचना ...........

मिडिया के साथ ब्लॉगर मीट दिल्ली में 

आज दिल्ली के आदर्श नगर शिव मंदिर में ब्लॉगर मीट का आयोजन किया गया  जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में  मदन विरक्त जी लक्ष्मी नगर से तथा डॉक्टर के . डी. कनोडिया आदर्श नगर से पधारे ...........इन सबके अलावा अविनाश वाचस्पति जी , राजीव  तनेजा जी , अजय कुमार झा जी , इंदु पूरी जी , वंदना गुप्ता जी , संगीता स्वरुप जी , पवन चन्दन चौखट जी , केवल राम जी , पदम् सिंह जी , उपदेश सक्सेना जी ,सुमित प्रताप जी और मेरे समेत काफी ब्लोगर्स  तथा मिडिया से जुड़े लोग एकत्रित हुए ............अभी सिर्फ इतना ही बाकी पूरा समाचार कल देखिएगा ............फ़िलहाल एक सूचना ….

आज के कार्यक्रम को 
आप इंडिया न्यूज़ चैनल पर
आज शाम ७:३० बजे देख सकते हैं .

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

अब सरसों खेतों में कहाँ उगती है

अब सरसों खेतों में कहाँ उगती है 
यादों के लकवे पहले ही उजाड़ देते हैं


अब भंवर नदिया में  कहाँ पड़ते हैं
अब तो पक्के घड़े भी डुबा देते हैं 


अब खुशबू मुट्ठी में कहाँ कैद होती है
इंसानी सीरत सी बाजारों में बिक जाती है 


अब रागों की बंदिशें कहाँ सजती हैं 
अब तो साज़ ही आवाज़ बदल देते हैं 


अब ख्वाब आँखों में कहाँ सजते हैं
ख्वाब से पहले इन्सान ही बदल जाते हैं  

अब वादियों में फूल कहाँ खिलते हैं
हर तरफ लहू के दरिया ही नज़र आते हैं  

मंगलवार, 18 जनवरी 2011

दिशाबोध

दिग दिगन्त तक दिग्भ्रमित 
करतीं अनंत मृगतृष्णायें
दिशाभ्रम का बोध कराती हैं
जीवन दिशाहीन  बना जाती हैं
मगर दीप सा देदीप्यमान होता
आस का दीपक 
दिग्भ्रमित दिशाओं को भी
दिशाबोध करा जाता है 



जितना तुम्हें पोषित किया

उतना तुमने मुझे शोषित किया

ब्रह्मांड की तरह अनंत


विस्तृत इच्छाओं

लो आज मैने तुम्हारा

बहिष्कार किया

सोमवार, 10 जनवरी 2011

मुझे तो इंसान अभी अभी मिला

वो कहते हैं इंसान कहीं खो गया
मगर मुझे तो अभी अभी मिला


अलमस्त,बदमस्त ,बेफिक्र सा
सारे जहाँ को दामन में लपेटे हुए
दुनिया को मुट्ठी में कैद करता हुआ
जनहु ऋषि सा ओक में पीता हुआ
गंगा को अपवित्र करता हुआ
अपने हाथ में भगवान पकडे हुए
ऊँगली के इशारे पर नचाता हुआ सा
मुझे तो इंसान अभी अभी मिला


एटम बम बनाता हुआ

जहाँ  को दाढ़ों में चबाता हुआ
मानवता को मसलता हुआ
शैतान को मात करता हुआ
आगे बढ़ने की चाह में
अपनों के सिर कुचलता हुआ
मुझे तो इंसान अभी अभी मिला


जीने के नए मानक गढ़ता हुआ
पीर पैगम्बर से ना डरता हुआ

अमनोचैन को नेस्तनाबूद करता हुआ 
खुद को खुदा समझता हुआ 
मरे हुए को और मारता हुआ 
मुझे तो इंसान अभी अभी मिला

शनिवार, 1 जनवरी 2011

शैशवावस्था में हूँ ...........

आज मै दस की हो ली
अब ग्यारहवें वर्ष में
प्रवेश किया है
चाहती हूँ आप सभी
इस  आने वाले
मेरे दशक में
मेरे साथी बनें
ये मेरे जीवन का
एक बहुत ही
उन्नत काल है
यहीं से तो मुझे
दिशा मिलेगी
और इसी में
मोहब्बत भी
परवान चढ़ेगी
देखो मुझे
संभाल लेना
बहकने मत देना
आप सबकी
छोटी सी प्यारी सी
नटखट सी
गुडिया हूँ
बचपन और यौवन
की संधि का वय: काल
हर नव - यौवना  के
जीवन का सबसे
नाज़ुक और अहम्
काल होता है
मुझे यौवन की
दहलीज पर
फिसलने मत देना
मुझ संग
सहयोग करना
फिर कल तुम्हारा
और मेरा
दोनों का
सँवर जायेगा
ज़िन्दगी को इक
दिशा दे जायेगा
आने वाल कल
रौशन  हो जायेगा
मेरा ख्याल रखना
फिर तुम्हारा भी
भविष्य खुशहाल
हो जायेगा
ज़िन्दगी को
फूलों सा महका जायेगा
देखो ना.............
मैं २१ वीं सदी हूँ
मगर अभी तो
बच्ची हूँ
शैशवावस्था में हूँ ..........



दोस्तों ,
नववर्ष की ये नयी सुबह आप सबके जीवन में खुशियाँ  , सुख और समृद्धि लेकर आये .......... आपके  और आपके परिवार के लिए नव वर्ष मंगलमय हो.आपका लेखन और उन्नत हो .