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बुधवार, 28 मई 2008
पहचान औरत की
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क्या औरत की ज़िंदगी हमेशा काँटों भरी ही रहेगी?हर औरत एक मुकम्मल जहाँ चाहती है मगर क्या उसे कभी mil पाता है उसका जहाँ?क्यों हर बार उसके साथ ही...
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मंगलवार, 27 मई 2008
जीने का ढंग
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जीना सीखना है तो फूल से सीख , सब kucchh सहना और हँसते रहना , हर सुबह काँटों की गोद में आँखें खोलना और phir भी मुस्कुराते रहना , कभी उफ़ भी ...
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सोमवार, 26 मई 2008
अभिव्यक्ति
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aasan नही होता ख़ुद को abhivyakt करना न जाने kitni बार ख़ुद से ही लड़ना पड़ता है न जाने kitni बार gir gir कर संभलना पड़ता है हर मोड़ पर एक नय...
2 टिप्पणियां:
शनिवार, 24 मई 2008
zindagi
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zindagi
शुक्रवार, 23 मई 2008
zindagi
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zindagi
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क्या कहूं
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कुछ कहना है मगर समझ नही आता क्या कहूं हर रिश्ता अजीब है हर इन्सान अजीब है कोई कुछ नही समझता यह कौन सा मोड़ है
11 टिप्पणियां:
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