पेज
(यहां ले जाएं ...)
Home
Index
▼
मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जायें हम दोनों
›
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जायें हम दोनों कहना कितना आसान लगता है ना मगर क्या वास्तव मे ये संभव है कैसे खुरच कर निकालोगे उन यादों के ढेर...
19 टिप्पणियां:
रविवार, 24 फ़रवरी 2013
डायलाग की एक शाम बेटियों के नाम
›
दोस्तों 23 फ़रवरी की शाम एक यादगार शाम बन गयी जब मिथिलेश श्रीवास्तव जी ने बेटियों के प्रति बढ रही असंवेदनशीलता के प्रति एक जागरुक...
9 टिप्पणियां:
सोमवार, 18 फ़रवरी 2013
लफ़्ज़ों को ओढना और बिछाना ही मोहब्बत नहीं होती.............
›
अपने गलत को भी तुमने सदा सही माना मेरी सच्चाई को भी तुमने सदा ही नकारा तुम तो अपनी कहकर सदा पलट जाते हो कभी मुड कर ना हकीकत जा...
13 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013
25 वर्षों का सफ़र एक स्वप्न-सा
›
ज़िन्दगी सफ़र है सुहाना कहीं काँटों भरी राह कहीं फ़ूलों का है खज़ाना साथी बस ऐसे ही साथ निभाना कभी रूठना कभी मनाना बस ...
26 टिप्पणियां:
रविवार, 10 फ़रवरी 2013
आखिरी लम्हों की मीठी यादों का सफ़र ………2013
›
आज हिन्द युग्म से प्रकाशित रश्मि प्रभा जी के संपादन में हमारी एक और किताब "नारी विमर्श के अर्थ " का विमोचन कवि उदभ्रांत जी के हाथ...
13 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें