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सोमवार, 5 नवंबर 2018
तुम खुदा नहीं हो
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मैं सो रहा था मुझे सोने देते चैन तो था अब न सो पाऊंगा और न जागा रह पाऊँगा मझधार में जैसे हो नैया कोई एक विशाल...
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मंगलवार, 25 सितंबर 2018
गौरतलब कहानियाँ मेरी नज़र में
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कहानियां, हमारे जीवन का आधार रही हैं आदिम काल से. जैसे जैसे सभ्यता विकसित होती गयी, कहानियाँ उसी के अनुसार आकार लेती रहीं. वक्त के ...
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सोमवार, 27 अगस्त 2018
मृत्यु , वास्तव में जाना नहीं होती....
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किसी के जाने के बाद झरती हैं यादें रह रह ये जाना वास्तव में जाना नहीं होता जाने वाला भी तो समेटे होता है रिश्तों की धार ...
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गुरुवार, 26 जुलाई 2018
और मैं .... शर्मिंदा हूँ
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मेरे चेहरे पर एक जंगल उगा है मतलबपरस्ती का मेरी दाढ़ों में माँस अटका है खुदगर्जी का आँखों पर लगा है चश्मा बेहयाई का ...
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बुधवार, 11 जुलाई 2018
फिर भी जिंदा हूँ
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मेरे पास उम्मीद की कोई सड़क नहीं कोई रास्ता नहीं कोई मंजिल नहीं फिर भी जिंदा हूँ मेरे पास मोहब्बत का कोई महबूब...
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