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शनिवार, 29 दिसंबर 2012

ख़ामोशी की गूँज ऐसी होनी चाहिए

क्या कहूं 
सत्ता बीमार है या मानसिकता 
इंसानियत मर गयी या शर्मसार है 
मौत तो आनी  है इक दिन 
मगर मौत से पहले हुयी मौत से 
कौन कौन शर्मसार है ?


क्योंकि 
न इंसानियत बची न इन्सान 
लगता है आज तो बस बेबसी है शर्मसार………

चेहरा जो ढाँप लिया तुमने
तो क्या जुर्म छुप गया उसमें
क्या करेगा ओ नादान उस दिन
जब तेरा ज़मीर हिसाब करेगा तुझसे

अब पीढियाँ ना हों शर्मसार
यारा करो कोई ऐसा व्यवहार

अब अंगार हाथ में रख
जुबाँ पर इक कटार रख 
देख तस्वीर बदल जायेगी
बस हौसलों की दीवार बुलंद रख 


ख़ामोशी की गूँज ऐसी होनी चाहिए 
सोच के परदे फाड़ने वाली होनी चाहिए 
व्यर्थ न जाये बलिदान उसका 
अब ऐसी क्रांति होनी चाहिए 
यही होगी सच्ची श्रद्धांजलि




जब तक मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक सुधार संभव नहीं क्योंकि देखो चाहे मृत्युदंड का प्रावधान है हत्या के विरुद्ध तो क्या हत्यायें होनी बंद हो गयीं नहीं ना तो बेशक कानून सख्त होना चाहिये इस संदर्भ में मगर उसके साथ मानसिकता का बदलना बहुत जरूरी है जब तक हमाiरी सोच नही बदलेगी जब तक हम अपने बच्चों से शुरुआत नहीं करेंगे उन्हें अच्छे संस्कार नहीं देंगे औरत और आदमी मे फ़र्क नहीं होता दोनो के समान अधिकार और कर्तव्य हैं और बराबर का सम्मान जब तक ऐसी सोच को पोषित नहीं करेंगे तब तक बदलाव संभव नहीं ।

10 टिप्‍पणियां:

  1. खामोशी की गूंज ही मन के सन्नाटे को हटा सकती है .... हर एक को आत्म मंथन करना होगा ....

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  2. श्रद्धांजलि***** चेहरा जो ढाँप लिया तुमने
    तो क्या जुर्म छुप गया उसमें
    क्या करेगा ओ नादान उस दिन
    जब तेरा ज़मीर हिसाब करेगा तुझसे
    अब पीढियाँ ना हों शर्मसार

    जवाब देंहटाएं
  3. aapके विचारों से सहमत हूँ दर असल मानसिक परिवर्तन के बिना कुछ नहीं हो सकता

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  4. परिवर्तन की जो आग भभकी है,उसे बुझने नहीं देना है ...

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  5. सार्थक रचना ...जब तक मानसिकता नहीं बदलेगी
    परिवर्तन असंभव है !

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  6. सार्थकता लिये सशक्‍त लेखन ...

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  7. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ... आशा है नया वर्ष न्याय वर्ष नव युग के रूप में जाना जायेगा।

    ब्लॉग: गुलाबी कोंपलें - जाते रहना...

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  8. दोनों गजलें लाजवाब ...

    वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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अपने विचारो से हमे अवगत कराये……………… …आपके विचार हमारे प्रेरणा स्त्रोत हैं ………………………शुक्रिया