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रविवार, 21 दिसंबर 2014

ये समय की मौत नहीं तो क्या है ?

घुटन चुप्पी विवशता 
और पथरायी आँखें 
बिना किसी हल के शून्य में ताक रही हैं 

कैसे शेर के कसे हुए जबड़ों में 
दबी चीख 
घायल हिरण सी 
फड़फड़ा रही है 

ताको सिर्फ ताको 
घूँट भरने को नहीं बची संवेदना 
जंगल और जंगली जानवरों का 
भीषण हाहाकारी शोर 
नहीं फोड़ेगा तुम्हारे कान के परदे 

इस समय के असमय होने के साक्षी हो 
विकल्प की तलाश में भटकते हुए 
अब क्या नाम दोगे इसे तुम ?

सोचना जरा 
ये समय की मौत नहीं तो क्या है ?

4 टिप्‍पणियां:

अपने विचारो से हमे अवगत कराये……………… …आपके विचार हमारे प्रेरणा स्त्रोत हैं ………………………शुक्रिया