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मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

दरिया वापस नही मुडा करते

मै तो आज भी
वहीं उसी मोड पर
खडी हूँ
जहाँ समय ने
तुम्हे मुझसे
...छीना था
मगर तुम ही
ना जाने कब
और कैसे
समय के साथ
बह गये
दरिया वापस
नही मुडा करते

36 टिप्‍पणियां:

सतीश सक्सेना ने कहा…

सच कहा है आपने ! हार्दिक शुभकामनायें !

यशवन्त माथुर ने कहा…

सही कहा आपने दरिया वापस नहीं मुड़ा करते.

सादर

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ओह ..कम शब्दों में गहन बात ...प्रस्तुति अच्छी लगी ...सागर के किनारे खड़ा होना था न ..बह जाने का डर नहीं होता :) :)

Kavita Prasad ने कहा…

कम शब्दों में अपने पूरे भावों को व्यक्त किया है आपने...

शुभकामनाये

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

कम शब्दों में प्रेम की गहन अभिव्यक्ति हो रही है... बहुत सुन्दर...

Shah Nawaz ने कहा…

वाह! क्या बात है! कम शब्दों में काफी कुछ कह दिया आपने!

संजय भास्कर ने कहा…

....कम शब्दों में गहन बात
सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

रजनीश तिवारी ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी,

सुन्दर प्रस्तुति है......वाकई सच है जो चला जाता है वो लौट कर नहीं आता....

anu ने कहा…

एक दम सच कहा ...दरिया वापस नही मुड़ा करते ......बधाई

एम सिंह ने कहा…

हाँ सही है. अक्सर ऐसा ही होता है.

सदा ने कहा…

वाह .... बहुत खूब कहा है आपने ।

aakash ने कहा…

bahut hi sundar prastuti shubhkamnaye.

विजय रंजन ने कहा…

jo choot gaya so choot gaya...mana wah ek sitara tha...par chhoot gaya to chhot gaya...uski takleef mat karo sakhi...wo sapna tha jo bas toot gaya...

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

दिल को छू गयी कहीं ये पंक्तियाँ - दरिया वापस नहीं मुड़ा करते हैं.

Udan Tashtari ने कहा…

भावपूर्ण.

राजेश उत्‍साही ने कहा…

कम शब्‍दों में गहरी बात। बधाई।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

दरिया वापस
नही मुडा करते... aur main khadi rahi ,
nihshabd

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

दरिया वापस नहीं मुडा करते !
काश कि तुम्हे यह इल्म होता !!
अति सुन्दर !

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

वाकई बहकर तुम ही आगे निकल गये जहाँ मुडना सम्भव नहीं । शुभकामनाएँ

रूप ने कहा…

सचमुच ! गुज़रा हुआ ज़माना आता नहीं दोबारा , हाफ़िज़ खुदा तुम्हारा !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सटीक!
मगर बनारस में तो उल्टी गंगा बहती है!
यानि दक्षिण से उत्तर की ओर को!

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत लम्बा इंतजार हे... लेकिन दरिया कभी उलटा थोडे बहता हे...बहुत सुंदर भाव. धन्यवाद

ZEAL ने कहा…

दरिया वापस नहीं मुड़ा करते ...Beautiful expression !

.

Rakesh Kumar ने कहा…

देखने का नजरिया अपना अपना
एक आपका और एक उनका
आप अपने नजरिये से ठीक
और वे भी अपने नजरिये से ठीक
अब किसको सही कहें और किसको गलत
समझने वालों का भी तो नजरिया अपना अपना

मीनाक्षी ने कहा…

शिला बनने की चाहत जानकर भी वहाँ कुछ कहे बिना चले गए थे लेकिन यहाँ बिना कुछ कहे कैसे जा सकते हैं...दरिया वापिस नहीं मुड़ा करते लेकिन राह बदल कर फिर से किसी दूसरे मोड़ पर मिल जाया करते हैं...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'दरिया वापस नहीं मुड़ा करते '

प्रभावी प्रस्तुति...सुन्दर ....सम्प्रेषण क्षमता से परिपूर्ण

मेरे भाव ने कहा…

दरिया वापस नहीं मुड़ा करते. खूबसूरत विम्ब .

वाणी गीत ने कहा…

दरिया वापस नहीं मुड़ा करते ,..
कम शब्दों में गहरी बात !

Minakshi Pant ने कहा…

दरिया तो बहता ही रहता मुड़ना उसने सीखा ही नहीं |
बहुत सुन्दर रचना |

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहने वाले रुकते नहीं हैं।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !
हार्दिक शुभकामनायें !

Anand Dwivedi ने कहा…

मगर तुम ही
ना जाने कब
और कैसे
समय के साथ
बह गये
दरिया वापस
नही मुडा करते.....
yahi sach hai vandana ji yahi sach hai.
sundar rachna !

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

bahut badhia ...
marm ko chhoote hue..gahan bhav hain...

sushma 'आहुति' ने कहा…

bahut sahi kaha aapne....

Dorothy ने कहा…

बेहद गहन अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.