पेज

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

रविवार, 9 अगस्त 2009

एक बेटी की पीड़ा ----------कब आओगी तुम

माँ
कहाँ हो तुम ?
जाने से पहले
यूँ भी न सोचा
तुम्हारे बाद
मेरा क्या होगा?
कौन मुझे चाहेगा?
कौन मुझे दुलारेगा ?
मेरे होठों की हँसी के लिए
कौन तड़प -तड़प जाएगा
मेरी इक आह पर
कौन सिसक- सिसक जाएगा
पिता ने तो अपनी
नई दुनिया बसा ली है
अब तो नई माँ की हर बात
उन्होंने मान ली है
तुम ही बताओ
अब कहाँ जाऊँ मैं
किसे माँ कहकर पुकारूँ मैं
यहाँ पग-पग पर
ठोकर और गाली है
तुम्हारी लाडली के लिए अब
कोई जगह न खाली है
माँ , कहाँ हो तुम ?
क्या मेरे दर्द को नही जानती
क्या अब तुम्हें दर्द नही होता
अपनी बेटी की पीड़ा से
क्या अब तुम्हारा
दिल नही रोता
क्यूँ चली गई जहान छोड़कर
मुझे भरी दुनिया में
अकेला छोड़कर
किस्से अपने सुख दुःख बाटूँ
कैसे मन के गुबार निकालूं
कौन है जो मेरा है ?
ये कैसा रैन-बसेरा है ?
जहाँ कोई नही मेरा है
अब तो घुट-घुट कर जीती हूँ
और खून के आंसू पीती हूँ
जिस लाडली के कदम
जमीं पर न पड़े कभी
वो उसी जमीं पर सोती है
और तुम्हारी बाट जोहती है
इक बार तो आओगी तुम
मुझे अपने गले लगाओगी तुम
मुझे हर दुःख की छाया से
कभी तो मुक्त कराओगी तुम
बोलो न माँ
कब आओगी तुम ?
कब आओगी तुम?

33 टिप्‍पणियां:

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढिया भाव पूर्ण रचना

M VERMA ने कहा…

बोलो न माँ
कब आओगी तुम ?
कब आओगी तुम?
एक बेटी की पुकार --- उसकी पीडा --- माँ के आने की उसको अपने पास पाने की व्यथा की कथा.
बखूबी निभाया है आपने
बखूबी बयान किया है आपने
बेहतरीन रचना रची है आपने

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

माँ-बेटी के सम्बन्धों का सुन्दर चित्रण किया है।
इस पोत्ट की जितनी तारीफ की जाये कम ही होगी।
बहुत-बहुत बधाई।

chandan ने कहा…

काफी भावनात्मक है, दिल भर आया......आख़िर अभी भी एक बेटी बेचैनी में मां को ही पुकारती है,,,,आज भी कुछ नहीं बदला

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना है

बधाई...

अजय कुमार झा ने कहा…

माँ बेटी के रिश्ते को परिभाषित करती एक अद्भुत रचना ..बहुत सुन्दर और मार्मिक ..

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

वंदना जी आपकी यह रचना पढकर मां को फोन करने के लिए दिल उतावला हो गया बहुत ही दिल को छू जाने वाली बेहतरीन रचना जितनी तारीफ की जाए कम है

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

भावुक व सुंदर.

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर !!

Nirmla Kapila ने कहा…

बहुत मार्मिक रचना है आँखें नम हो गयी ---ाब तो घुट घुट कर जीती हूँ
खून के आँसू पीती हूँ
सच मांम ही है जो बेटी के दुख दर्द को समझ सकती है
बोलो न माँ
कब आओगी तुम ?
कब आओगी तुम?
दिल चीर गयी ये अभिव्यक्ति अब निश्ब्द हूँ शुभकामनायें

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' ने कहा…

आपकी इन पंक्तियों ने स्वर्गीय माँ सव्यसाची
का स्मरण करा दिया , कदाचित माँ की बात
जोती मेरी आत्मा की आवाज़ आपने लिख दी
इक बार तो आओगी तुम
मुझे अपने गले लगाओगी तुम
मुझे हर दुःख की छाया से
कभी तो मुक्त कराओगी तुम
बोलो न माँ
कब आओगी तुम ?
कब आओगी तुम?

Mithilesh dubey ने कहा…

बेहतरीन. रचना बधाई।

'अदा' ने कहा…

marmik bhav liye hue hai aapki kavita..
maa aur beti ke rishte ke prem se sarabor...bahut hi sundar prastuti...

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

बहुत बढ़िया कविता है

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

भावपूर्ण रचना...

Prem Farrukhabadi ने कहा…

इक बार तो आओगी तुम
मुझे अपने गले लगाओगी तुम
मुझे हर दुःख की छाया से
कभी तो मुक्त कराओगी तुम
बोलो न माँ
कब आओगी तुम ?
कब आओगी तुम?

apki abhivyakti sachmuch sarahneey hai.

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

एक बेटी की दर्द भरी पुकार को आवाज देती आपकी ये रचना बहुत ही बेहतरीन है। पता नही कौन कौन से दर्द लेकर जी रहे है लोग। बहुत पसंद आई यह रचना।

mehek ने कहा…

bahut hi sunder bhav,marmik.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

bahut hi marmik rachna........

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

nice poem with heart touching approach.

http://www.ashokvichar.blogspot.com

वाणी गीत ने कहा…

इस पर भी ना पसीजे ...वह माँ कहलाने योग्य नहीं ..!!

बेनामी ने कहा…

rishton mein jitna apnapan hota hai us se kahin adhik usmein pidha bhee chhupee hotee hai.us pidha ko samajane ke liye jin ankhon va vyakt karne ke liye jis lekhnee kee jaroorat hoti, vah avashya hee aapke pass hai. Kavita ke liye Badhaai. samay mile to "sanvadghar mein hua nishabd" mein "Dadi man ki vyath" avashy padhen.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

atyant sundar rachna hai aapki....
keep writing...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मार्मिक.......... एक बेटी के मन की व्यथा, जो इन सब से गुज़रती है.......... दर्द भरी दास्ताँ को शब्दों में उरेक दिया है आपने....... aankhe nam हो aayi rachna पढ़ कर

sada ने कहा…

बोलो न माँ
कब आओगी तुम ?
कब आओगी तुम?

मां-बेटी की ममता को बहुत ही गहरे भावों के साथ सुन्‍दर शब्‍दों से सजाया है आपने इस रचना को बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति बधाई ।

चंदन कुमार झा ने कहा…

अद्वितिय रचना...बहुत सुन्दर.

Vinayak Sharma ने कहा…

Aug.09,2009 , 8:38 par bhejee gai benami tippni meri hee thee.

राकेश कुमार ने कहा…

वन्दना जी, पढते हुये आन्खे नम हो आयी, बहुत सुन्दर भाव, बडी पीडादायक स्थिति होती होगी उन बेटियो के लिये जब ऐसे क्षण आते होन्गे.

इतनी जल्दी त्वरित गति से उस विषय पर कविता बनाना आपके विलक्षण प्रतिभा को दर्शाता है. बहुत सुन्दर रचना.

सादर
राकेश

अर्शिया अली ने कहा…

Sach men, jise sirf beti hee mahsoos saktee hai.
{ Treasurer-T & S }

योगेश स्वप्न ने कहा…

marmik, dil ko chhooti rachna . sunder abhivyakti.

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

maa aur beti ko dard ko tumne bahut hi shashakt dang se vyakt kiya hai .. is rachna ke liye mera salaam kabul karen...

namaskar

vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

भूतनाथ ने कहा…

jo chala gayaa..use bhool ja....vo naa sun sakegaa teri sadaa....jo chala gaya use bhool jaa......!!

aarkay ने कहा…

जीवन के एक कटु सत्य को अभिव्यक्ति देती एक सशक्त रचना . साधुवाद!