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शुक्रवार, 14 अगस्त 2009

प्रेम की सर्पीली डगर

प्रेम के बंधन में बंधे
कभी मोहन है , कभी श्यामा है
प्रेम की सर्पीली डगर
कौन समझा है , कौन जाना है
प्रेम में प्रेमी का रुख
कभी तोला है , कभी माशा है
प्रेम के पलडों में तुले
कभी मीरा है , कभी राधा है

22 टिप्‍पणियां:

adwet ने कहा…

such prem ki dagar sarpili hi hai. achhi kavita. vadhai.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

प्रेम का डगर,
बहुत सुंदर,

M VERMA ने कहा…

प्रेम में प्रेमी का रुख
कभी तोला है , कभी माशा है
प्रेम को जानना वाकई आसान नही है

ओम आर्य ने कहा…

aisa yah prem kyon hai ........par ehsaas to ek se hi hai na

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

janmastmi par ye post bada mahatva rakhati hai.
बहुत-बहुत बधाई।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

अत्यन्त सुंदर अभिव्यक्ति है!
जन्माष्टमी और स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें!
दास,
सुरेन्द्र "मुल्हिद"

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

प्रेम के पलडों में तुले
कभी मीरा है , कभी राधा है ......बहुत सुन्दर बधाई कृष्ण जन्माष्टमी की

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
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INDIAN DEITIES

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
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INDIAN DEITIES

vinay ने कहा…

प्रेम इक अनबूझ पहेली है,वाकइ मै येह सर्पीली ड्गर है.

vinay ने कहा…

प्रेम इक अनबूझ पहेली है,वाकइ मै येह सर्पीली ड्गर है.

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

वाह आज के दिन इससे पढना बहुत अच्छा लगा।
प्रेम के पलडों में तुले
कभी मीरा है , कभी राधा है
सच इनके प्यार की गहराई को समझना हर किसी के वश के बात नही। और आज तो आपके ब्लोग कृष्ण चारों तरफ दोड् रहे है।

अनिल कान्त : ने कहा…

बहुत प्यारी रचना है

MUFLIS ने कहा…

प्रेम की सर्पीली डगर
कौन समझा है , कौन जाना है ....

एक अच्छी नपी-तुली रचना ....
लेकिन बहुत गहरे और सात्विक विचार
लिए हुए ....भावनात्मक अभिव्यक्ति . . .
---मुफलिस---

रंजना ने कहा…

Prem tatv ki sahi vyakhya ki aapne..Bahut sundar rachna...

Nirmla Kapila ने कहा…

वन्दना जी लाजवाब अभिव्यक्ति है
प्रेम के पलडों में तुले
कभी मीरा है , कभी राधा है
जन्माश्तमी की शुभकामनायें

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
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INDIAN DEITIES

Prem Farrukhabadi ने कहा…

bahut sundar!

अनिल कान्त : ने कहा…

behad khoobsurat bhaav

भूतनाथ ने कहा…

are vaah....chand pantiyon men kitti gahari baat kah dee aapne.... shubhanallaah....!1

राकेश कुमार ने कहा…

जमाष्टमी पर बडी सुन्दर कविता लिखी आपने, पर वन्दना जी इसे थोडा और लम्बा करती तो कविता और भी सुन्दर हो जाती.

राकेश

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

prem ka bandhan hi to sabse bada aur pyaara aur mulyawaan bandhan hai ... is choti si kavita me aapne to praan foonk diye hai ... aur sach me kisne samjha hai prem ko ......

waah

badhai ho ji