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मंगलवार, 2 मार्च 2010

मुर्गा कटता रहता है

चल पागल
मोहब्बत करनी
भी नहीं आती
झूठे वादे करके
कोई वादा पूरा
न करना
जन्मों के इंतज़ार
की बातें करके
इस जन्म में भी
इंतज़ार न करना
मुरझाये गुल को भी
गुलाब बता देना
खाली पास- बुक को
अम्बानी की बता देना
उधार की गाड़ी को
अपना बना लेना
ये है आज का चलन
और तू है पागल
मोहब्बत के नाम पर
कुर्बान हुआ जाता है
जान हलाल किये जाता है
आँसू बहाए जाता है
वफ़ाओं की दुहाई
दिए जाता है
यहाँ किसी को
दर्द नही होता
यहाँ कोई
किसी के लिए
नहीं मरता है
आज तू , कल
कोई और सही
बस इसी तर्ज़ पर
मुर्गा कटता रहता है

26 टिप्‍पणियां:

Mithilesh dubey ने कहा…

मम्मी आपने अन्तिम की पंक्तियों में बहुत कुछ कह दिया , बहुत सही व बहुत ही खूबसूरत कविता लगी ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

यहाँ कोई
किसी के लिए
नही मरता है
आज तू , कल
कोई और सही
बस इसी तर्ज पर
मुर्गा कटता रहता है

कसाईरूपी शिव के सामने सब मजबूर है!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

यहाँ कोई
किसी के लिए
नही मरता है
आज तू , कल
कोई और सही
बस इसी तर्ज पर
मुर्गा कटता रहता है

कसाईरूपी शिव के सामने सब मजबूर है!

सलीम खान ने कहा…

यहाँ कोई
किसी के लिए
नही मरता है
आज तू , कल
कोई और सही
बस इसी तर्ज पर
मुर्गा कटता रहता है!!!!!

Great!!!!!!

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

वंदना जी,
आपका व्यंग्य "मुर्गा कटता रहता है " पढ़ा, दो बार पढ़ा.
इसे आज के ज़माने की हकीक़त, चलन या मानसिकता कह सकते हैं कि हमने अपने मानवीय मूल्यों को कितना गिरा दिया है.
मोहब्बत या प्रीति जैसे "अनमोल" रिश्तों को हम छोटे छोटे स्वार्थों या चंद चाँदी के टुकड़ों से बदलने लगे हैं.
आज के प्रायोगिक युग में इंसान अपनी पारंपरिक व्यवहारिकता कितनी खोता जा रहा है , इसकी एक बानगी वंदना जी ने प्रस्तुत की है. काश, पाठक इस विषय पर कुछ क्षण चिंतन-मनन कर पाए !!!!
इन पंक्तियों के लिए विशेष तौर पर बधाई -

"यहाँ किसी को
दर्द नहीं होता
यहाँ कोई
किसी के लिए
नहीं मरता है"

- विजय तिवारी "किसलय "

संजय भास्कर ने कहा…

हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

आप अब तो कड़वे कड़वे सच लिखने लगी है।

संजय भास्कर ने कहा…

यहाँ कोई
किसी के लिए
नहीं मरता है
आज तू , कल
कोई और सही
बस इसी तर्ज़ पर
मुर्गा कटता रहता है

इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

राकेश कौशिक ने कहा…

सब कुछ तो आपने ही कह दिया - हमारे बोलने के लिए कुछ छोड़ा ही नहीं - शानदार कविता - बधाई

aarkay ने कहा…

सब प्यार की बातें करते हैं
पर करना आता प्यार नहीं
है मतलब की दुनिया सारी
यहाँ कोई किसी का यार नहीं

किसी को सच्चा प्यार नहीं

बहुत खूब.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

bahut he sahi baat kahi...
murga kat ta rehta hai!

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

मजाक-मजाक में काफी गूढ़ बात कह दी आपने !

Arvind Mishra ने कहा…

जोरदार और सटीक !

पवन *चंदन* ने कहा…

मुर्गा हो या मुर्गी
कटता भी रहा
बंटता भी रहा
आपने बिल्‍कुल
सही कहा

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

सच्चाई बयां करती हुई कविता । बहुत सुंदर ।

sangeeta swarup ने कहा…

यहाँ किसी को
दर्द नही होता
यहाँ कोई
किसी के लिए
नहीं मरता है

आज की मानसिकता का सटीक वर्णन किया है...व्यंगात्मक शैली होते हुए भी बात में गहराई है...

निर्मला कपिला ने कहा…

यहाँ कोई
किसी के लिए
नही मरता है
आज तू , कल
कोई और सही
बस इसी तर्ज पर
मुर्गा कटता रहता है।
आज कल की दुनिया के स्वार्थ पर ये पँक्तियाँ बिलकुल सही हैं। बधाई इस रचना के लिये।

शरद कोकास ने कहा…

मुर्गा तो कटेगा ही ....

M VERMA ने कहा…

आज तू , कल
कोई और सही
बस इसी तर्ज़ पर
मुर्गा कटता रहता है
अलग शैली की शानदार रचना
जबरदस्त अन्योक्ति और व्यंग्य

महफूज़ अली ने कहा…

यहाँ कोई
किसी के लिए
नहीं मरता है
आज तू , कल
कोई और सही
बस इसी तर्ज़ पर
मुर्गा कटता रहता है.....

ज़बरदस्त पंक्तियों के साथ..... मनभावन रचना....

Kusum Thakur ने कहा…

वाह वन्दना जी, अपने बिल्कुल सही कहा है " यहाँ किसी को दर्द नहीं होता , यहाँ किसी के लिए कोई नहीं मरता "

limty khare ने कहा…

bahut badiya vandna aaj ke samay main yeh bat bilkul prasangik hai. khoob karene se vyanga kiya hai . . .

rashmi ravija ने कहा…

मुरझाये गुल को भी
गुलाब बता देना
खाली पास- बुक को
अम्बानी की बता देना
उधार की गाड़ी क
अपना बना लेना
ये है आज का चलन
अरे वाह...सारे सच बता दिए आपने...अब क्या होगा..उन प्रेमियों का...बेचारे...अब नए बहाने ढूंढेंगे ....
बढ़िया रचना

CS Devendra K Sharma ने कहा…

waah

madam apki rachna padhkar hridaya bhaaw wibhor ho utha...apne kya khoob likha hai..
यहाँ कोई
किसी के लिए
नही मरता है
आज तू , कल
कोई और सही
बस इसी तर्ज पर
मुर्गा कटता रहता है.....inshallah mazaa aa gya

अजय कुमार ने कहा…

आज की दुनियादारी है ये ,क्या कहें

Indranil Bhattacharjee ने कहा…

मुरझाये गुल को भी गुलाब बता देना ......आपकी कवितायेँ अच्छी लगी