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शनिवार, 3 अप्रैल 2010

यादों का विकल्प

यादों की कहानी 
यादों के फ़साने 
हर दिल ने गाये
हर दिलजले ने
जीने का सबब बनाया
यादों का ही 
कफ़न सजाया
किसी ने खुद को 
नशे में डुबाया
तो किसी ने 
ज़िन्दगी को 
कर्मभूमि बनाया
मगर यादों से 
कभी बच ना पाया 
दिल-ओ-दिमाग को
यादों की गिरफ्त से
ना कोई छुड़ा पाया
 और कभी कोई ना
ढूंढ पाया
यादों का विकल्प
चाहे कितना ही 
अंधेरों में छुपाया
दिल की तहों में
लाख दबाया
मगर फिर भी
कोई ना कोई याद
किसी ना किसी 
कोने से कब , कैसे
दस्तक दे ही जाती है
फिर यादों को 
कहाँ दफ़न करे कोई
और कैसे 
यादों के विकल्प 
ढूंढें कोई

20 टिप्‍पणियां:

rashmi ravija ने कहा…

किसी ना किसी
कोने से कब , कैसे
दस्तक दे ही जाती है
फिर यादों को
कहाँ दफ़न करे कोई
और कैसे
यादों के विकल्प
ढूंढें कोई
बहुत सुन्दर कविता....यादों का विकल्प तो सच कोई नहीं....

रश्मि प्रभा... ने कहा…

अगले संचयन की तैयारी शुरू है...................'अनुगूँज
भावनात्मक, समसामयिक, प्रेरणात्मक रचनाएँ..........४ से ५ रचनाएँ.........४ हज़ार की राशि देय होगी. कवितायेँ अधिक लीं या
पृष्ठ संख्या अधिक हुई तो उसके हिसाब से राशि बढ़ सकती है.............
फिलहाल रचनाएँ, परिचय , तस्वीर..............राशि अंत में
यदि आप शामिल होना चाहते तो संपर्क करें

रश्मि प्रभा... ने कहा…

yaadon ka koi vikalp hota bhi nahin , shabd to bas sahchar hote hain

एक गली जहाँ मुडती है ने कहा…

sunder rachna hai
bahut khub

एक गली जहाँ मुडती है ने कहा…

suder rachna hai
bahut khub

अजय कुमार झा ने कहा…

बहुत सुंदर रचना है जी ..वंदना जी शुभकामनाएं लिखते रहिए ..
अजय कुमार झा

Shekhar kumawat ने कहा…

wow achi rachan he
aap ko badhai

yado ki kagani kado ka fasana

bahut achi lagi

shekhar kumawat


http://kavyawani.blogspot.com/

Akhtar Khan Akela ने कहा…

aadrniya yaadon ka kuch thik nhin hota yeh maashuq ki trah bevfa nhin hotin yeh aati hen to bus hmeshan saath rehkr saath nibhaati hen so yeh sbse zyaada vfaadaar hoti hen nan aapki kvita bhut khub thi aapne gaagar men saager bhra he yaadon ke nye frsfe ko janam diya he aapko iske liyen bhut bhut badhaai ho. akhtar khan akela kota rajasthan

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

यादें तो अनमोल धरोहर है!
कभी-कभी ये तड़पाती हैं
और कभी-कभी जीने की प्रेरणा दे जाती हैं!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

Bahut sundar bhawnatmak kavita hai....sach puchiye to Insaan ko Yaadon ki wajah se tadapna bhi padhta hai...par aksar yadon ka hi sahara hota hai...yadon ke bina Zindagi shayad bemani ho jaye.

देवेश प्रताप ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना .....यादें जो हमेशा साथ रहेती है ......

M VERMA ने कहा…

कोई ना कोई याद
किसी ना किसी
कोने से कब , कैसे
दस्तक दे ही जाती है
यादें न जाने किस मिट्टी के बने होते हैं अनचाहे ही आ जाते हैं
सुन्दर एहसास

Suman ने कहा…

nice

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत खूबसूरती से लिखा है यादों का फ़साना ....यादें ही जीवन कि धरोहर होती हैं...बहुत खूब

दिगम्बर नासवा ने कहा…

यादों का विकल्प .... बस इक ये चीज़ ही तो है दिल के मारों के पास ... वो भी न हो तो कैसे कोई जिएगा ...
बहुत अच्छा लिखा है आपने .....

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

...सुन्दर रचना!!

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

किसी ना किसी
कोने से कब , कैसे
दस्तक दे ही जाती है
फिर यादों को
कहाँ दफ़न करे कोई
और कैसे
यादों के विकल्प
ढूंढें कोई
बहुत खूब.....!!

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

यादें हँसाती है रुलाती है बस विकल्प ही नही होता उनका। बहुत खूब।

vishal ने कहा…

दिल को छू जाने वाली रचनाएँ हैं आपकी वंदना जी। चाह कर भी नहीं रोक पाया तारीफ करने से।

vishal ने कहा…

लहरों की तरह यादें, दिल से टकराती हैं, तूफान उठाती है, लहरों की तरह यादें ...