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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

क्षणिकाएं

तेरा चहकना
महकना ,मचलना
खिलखिलाना 
कुछ यूँ लुभाता है
जैसे कोई नदिया तूफानी 
सागर के सीने पर
अठखेलियाँ कर रही हो 

तेरे पहलू में 
सिर रखकर
सुकून पाना
अब किस्मत नहीं
तुझे याद रखना
या भूल जाना
अब बस में नहीं


दीदार तेरा हो 
अक्स मेरा हो
रूह तेरी हो
जिस्म मेरा हो
नींद तेरी हो
ख्वाब मेरा हो
मौत मेरी हो जिसमें
वो गोद तेरी हो 


नज़्म बना मुझे
कागज़ पर उतार मुझे
ख्वाहिश बना मुझे
नज़रों में बसा मुझे
तेरी चाहत का सिला बन जाऊँ
बस एक बार पुकार मुझे 


ख्वाबों के सूखे दरख्तों पर 
आशियाँ बनाया नहीं जाता
हर चाहने वाली सूरत को
दिल का दरवाज़ा दिखाया नहीं जाता 


तेरे ग़मों की दुनिया में
अश्क मेरे बहते हैं
दर्द के ये कुछ फूल हैं
जो काँटों पर ही सोते हैं

 

25 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना ...आभार

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

महफूज़ अली ने कहा…

तेरे पहलू में
सिर रखकर
सुकून पाना
अब किस्मत नहीं
तुझे याद रखना
या भूल जाना
अब बस में नहीं...

यह पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगीं.... बिलकुल ऐसा लगा कि मन बात कही गई हो.....

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) ने कहा…

bhut khub vandana ji ye laayne bhut hi sundar
ख्वाबों के सूखे दरख्तों पर
आशियाँ बनाया नहीं जाता
हर चाहने वाली सूरत को
दिल का दरवाज़ा दिखाया नहीं जाता
yathart ke saath samvednao ko sajoya hai aap ne
saadar
praveen pathik
9971969084

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

सभी "क्षणिकाएं" बहुत अच्छी हैं ... खास कर ये पंक्तियाँ मुझे बहुत अच्छी लगी ....
नज़्म बना मुझे
कागज़ पर उतार मुझे
ख्वाहिश बना मुझे
नज़रों में बसा मुझे
तेरी चाहत का सिला बन जाऊँ
बस एक बार पुकार मुझे

रश्मि प्रभा... ने कहा…

नज़्म बना मुझे
कागज़ पर उतार मुझे
ख्वाहिश बना मुझे
नज़रों में बसा मुझे
तेरी चाहत का सिला बन जाऊँ
बस एक बार पुकार मुझे
kya baat hai

कविता रावत ने कहा…

नज़्म बना मुझे
कागज़ पर उतार मुझे
ख्वाहिश बना मुझे
नज़रों में बसा मुझे
तेरी चाहत का सिला बन जाऊँ
बस एक बार पुकार मुझे
.....bahut khoob
Haardik shubhkamnayen

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

तेरा चहकना
महकना ,मचलना
खिलखिलाना
कुछ यूँ लुभाता है
जैसे कोई नदिया तूफानी
सागर के सीने पर
अठखेलियाँ कर रही हो

रचना बहुत ही शानदार है!
गहन अर्थ लिए हुए शब्द
सीधे हृदय में उतर जाते हैं!

sangeeta swarup ने कहा…

हर क्षणिका एक से एक बढ़ कर .....
नज़्म बना मुझे
कागज़ पर उतार मुझे
ख्वाहिश बना मुझे
नज़रों में बसा मुझे
तेरी चाहत का सिला बन जाऊँ
बस एक बार पुकार मुझे

ये बहुत अच्छी लगी...

Deepak Shukla ने कहा…

नमस्कार..

क्षणिकाओं मैं उलझा ऐसा...
भूल गया ये क्षणिकाएं हैं...
भावों की प्रस्तुति ऐसी है..
लगा की सब ही कवितायेँ हैं...

वाह...

दीपक शुक्ल...

Deepak Shukla ने कहा…

नमस्कार..

क्षणिकाओं मैं उलझा ऐसा...
भूल गया ये क्षणिकाएं हैं...
भावों की प्रस्तुति ऐसी है..
लगा की सब ही कवितायेँ हैं...

वाह...

दीपक शुक्ल...

Deepak Shukla ने कहा…

MAFI CHAHTA HUN...MAIN DEKH NAHIN PAYA KI TIPPANI KA MODRATION ON HAI.. TIPPANI 2 BAAR BHEJ DI...

SORRY...

Deepak Shukla..

M VERMA ने कहा…

तेरी चाहत का सिला बन जाऊँ
बस एक बार पुकार मुझे
एहसासों की सुन्दर रचनाएँ

नीरज गोस्वामी ने कहा…

इस भावपूर्ण रचना के लिए बधाई...
नीरज

राकेश कौशिक ने कहा…

नज़्म बना मुझे
कागज़ पर उतार मुझे

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

वंदना जी बहुत बढ़िया और गहरे भाव से भरी है आपकी यह प्रस्तुत क्षणिकाएँ..सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

Kumar Jaljala ने कहा…

आजकल तो लोग जलजला का नाम सुनकर ही घबरा जाते हैं लेकिन जलजला आपको इस बेहतर रचना के लिए सलाम करता है। खुदा करें आप और अधिक अच्छा लिखें। यह तभी संभव है जब आप टिप्पणी करने वालों के ब्लाग के अलावा अन्य ब्लागों पर भी जाएंगी। आपके लेखन की भावना पूरी तरह से पवित्र है... लेखन में पवित्रता के पाखंड से बचना भी एक अनिवार्य शर्त हैं। आपको शुभकामनाएं।

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

सभी बहुत सुन्दर लिखी गयी हैं पसंद आई शुक्रिया

वाणी गीत ने कहा…

नज़्म बना
कागज़ पर उतार मुझे ...
बहुत सुन्दर ...
हर चाहने वाली सूरत को दिल का दरवाजा दिखाया नहीं जाता ...
बहुत ही बढ़िया ...!!

अजय कुमार ने कहा…

क्या कहने बहुत खूब -
रूह तेरी हो ----जिस्म मेरा हो

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

वाह .....बहुत खूब ....!!

हिमान्शु मोहन ने कहा…

क्षणिकाएँ सुन्दर, अगर प्रत्येक के बाद कोई ऐसा चिह्न हो जो बताए कि यहाँ के बाद अगली रचना है, तो और अच्छा लगेगा।
समझ में तो ख़ैर अभी भी आ रहा है।

KSS Kanhaiya (के एस एस कन्हैया) ने कहा…

जो अच्छा लिखते ही रहते हैं उन्हें हर बार अच्छा सुन्दर कहते चले जाने में संकोच होता है और बहुत बार इसीलिये आपकी रचना की सराहना कमेन्ट के रूप में पोस्ट ना होती, बस होंठों पर आकर रह जाती है.

आज आपकी पंक्ति

हर चाहने वाली सूरत को
दिल का दरवाज़ा दिखाया नहीं जाता

की सराहना करने की बड़ी इच्छा हुई, सो की बोर्ड का इस्तेमाल कर रहा हूँ.

के एस एस कन्हैया

सतीश सक्सेना ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वह .. जलवाब .. हर क्षणिका जबरदस्त है ...