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शनिवार, 29 जनवरी 2011

अर्थ

इतना मुश्किल है क्या
हँसी का अर्थ ढूंढना
अभी तो सिर्फ एक ही
अर्थ कहा है ढूँढने को
गर रोने के अर्थ
ढूँढने पड़ते
तो शायद सदियाँ
गुजर जातीं
और तुम
रीते हाथ
वापस आ जाते
एक मुस्कान चस्पा
करके
और उस हँसी का
अर्थ तब शायद
मैं बता देती
मगर तुम
तुम तो शायद
किसी भी हँसी
का कोई अर्थ
नहीं जानते
या जान कर
अनजान बनते हो
कहीं अर्थ का
अनर्थ ना बन जाये
और कोई हँसी
तुम्हारा पर्याय
ना बन जाये

33 टिप्‍पणियां:

वाणी गीत ने कहा…

मुश्किल नहीं हंसी या आंसू का अर्थ ढूंढना ...या बहुत मुश्किल है ...
मगर सबसे मुश्किल है इसके अर्थ को ढूँढने वाले का मिलना ..:)

अरूण साथी ने कहा…

बहुत ही सुन्दर..

अख़्तर खान 'अकेला' ने कहा…

bhn ji shi khaa aapne hnsi kaa arth jb mushkil he dhundhna to fir rone ka arth dhundhne men to sdiyaan hi guzr jaayengi lekin is kaa arth vndnaa bhn ji aap zrur agli rchna men dhundh laayengi aesaa hmaara aapke rchna dhrm pr vishvas he , akhtar khan akela kota rajsthan

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι ने कहा…

अच्छी अभिव्यक्ति , मुबारकबाद।

Udan Tashtari ने कहा…

उत्तम-भावपूर्ण!!

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

अर्थ के विभिन्न आयामों को दिखाती कविता बहुत प्रभावित कर रही है

saanjh ने कहा…

agar rone ke arth dhoondne padte to shayad sadiyaan beet jaati.....bohot khoob....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जब हँसी के अर्थ ढूढ़ने में रोचकता है, दुख के स्वरों में क्यों उतरा जाये।

पद्म सिंह ने कहा…

गर रोने के अर्थ
ढूँढने पड़ते
तो शायद सदियाँ
गुजर जातीं

सुंदर अभिव्यक्ति

sada ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर भाव ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

रोने के अर्थ फिर भी मिल जायेंगे ..अब तो हंसी के अर्थ ढूँढना मुश्किल है ...और वाणी जी ने सही कहा है की अर्थ ढूँढने वाले का मिलना ज्यादा मुश्किल है ..

यशवन्त माथुर ने कहा…

बेहतरीन!

सादर

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

अर्थ का अनर्थ न बन जाए इसलिये जानकर ही अनजान लगते होंगे ।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

उत्तम,भावपूर्ण "हंसी" पर गंभीर कविता.

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना...

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुंदर जी

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी,

अजी कोई कुछ भी कहे आप तो जी बस हँसती ही रहना....

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

sach me bada mushkil hai hassi ka arth dundhna...:)
kabhi bhi adhro pe ek halki si muskan aa jati hai..:)

ek bhawpurn rachna..

मनोज कुमार ने कहा…

इस कविता में बिल्‍कुल नई सोच और नए सवालों के साथ जीअन की मौजूदा जटिलताओं को उजागर किया है आपने।

संजय भास्कर ने कहा…

अर्थ के विभिन्न आयामों को दिखाती कविता
निराला अंदाज है. आनंद आया पढ़कर.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

इतना मुश्किल है क्या
हँसी का अर्थ ढूंढना
अभी तो सिर्फ एक ही
अर्थ कहा है ढूँढने को
गर रोने के अर्थ
ढूँढने पड़ते
तो शायद सदियाँ
गुजर जातीं...
----
बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति!
आपकी सोच की गहराई को मापना कठिन है!

संगीता पुरी ने कहा…

अच्‍छा लिखा !!

निर्मला कपिला ने कहा…

वाणी से सहमत हूँ।

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

हँसी का अर्थ को ले कर सार्थक रचना| बधाई वंदना जी|

Kailash C Sharma ने कहा…

रोने के अर्थ ढूंढने की जगह आप हंसी के ही अर्थ ढूंढें तो ज्यादा अच्छा रहेगा..बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत सुन्दर

कुश्वंश ने कहा…

अभिव्यक्ति के विभिन्न आयामों को दिखाती कविता.... रोने के अर्थ, ढूँढने पड़ते,तो शायद सदियाँ, गुजर जातीं, सुन्दर..

राज शिवम ने कहा…

अर्थ बड़ा ही व्यापक है आपकी रचनाओं का.....मै आज आपकी कविता बारी बारी से पढ़ने बैठा हूँ....बहुत खुब....आपकी लेखनी का जादू सर्वविदित है।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

vandana ji...
har baar ki tarah manmohak rachnaa!!

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

कभी हँसी टूटी थी पहली दफा कांच की चूड़ी में
उसने तब से चूड़ियाँ पहनना बंद कर दिया ......

Asha ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव प्रधान कविता |
आशा

neelima garg ने कहा…

atyant bhavpuran...

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

acchi kavita ..thoda sa rahasay liye hue hai ... badhayi

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

kuch der shaant rahana hai ise padhne ke baad