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मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

बस निर्णय करो ..........किस तरफ से ?



ना लीक पर
और ना लीक से हटकर
कुछ भी तो नहीं रहा पास मेरे
ना कुछ कहना
ना कुछ सुनना
एक अर्धविक्षिप्त सी तन्द्रा में हूँ
किसी स्वर्णिम युग की दरकार नहीं
और ना ही किसी जयघोष की चाह
खुश हूँ अपने पातालों में
फिर भी कशमकश के खेत
कैसे लहलहा रहे हैं ........
आदिम वर्ग कितना खुश है
और मेरी जड़ सोच के समूह कितने कुंठित
फिर भी जिह्वया लपलपा रही है
ज्यों मनचाही पतंग काटी हो
ये सोच पर पड़े पालों पर
ना जाने कैसे इतने सरकंडे उग आये हैं
कि  कितना दुत्कारो
कितना समझाओ
मगर आकाश बेल से बढे जा रहे हैं
अब जड़ों को चाहे कितना खोदो
बीज कब और कहाँ रोपित हुआ था
उसका न कोई अवशेष मिलेगा
जीना होगा तुम्हें ............हाँ ऐसे ही
इसी अधरंग अवस्था में
क्योंकि
ना तुम लीक पर हो
ना लीक से हटकर हो
तुम उस दुधारी तलवार पर हो
जिसके दोनों तरफ तुम्हें ही कटना है
बस निर्णय करो ..........किस तरफ से ?

इतिहास की किताब का महज एक पन्ना भर हो तुम

क्योंकि
संस्कृति और संस्कार तो सभ्यताओं संग ही ज़मींदोज़ हो चुके हैं
अब पुरातत्वविदों के लिए महज शोध का विषय हो तुम ..............

17 टिप्‍पणियां:

सदा ने कहा…

सार्थकता लिये सशक्‍त प्रस्‍तुति

सादर

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति..

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति , आज जरूरत है ऐसे ही अभिव्यक्ति की .

Từ Thiên Hương Sen ने कहा…

http://tuthienhuongsen.blogspot.com/

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आज सुधार लें, इतिहास पर गर्व करने का वातावरण बन जायेगा।

कालीपद प्रसाद ने कहा…

विचारणीय प्रश्न ,सार्थक प्रस्तुति

latest post बे-शरम दरिंदें !
latest post सजा कैसा हो ?

Ashok Saluja ने कहा…

सटीक! बस तुम्हें ही कटना है ..निर्णय करो ..किस तरफ से ........

somali ने कहा…

atyant sarthak prasrtuti

Kumar Gaurav Ajeetendu ने कहा…

बहुत भावपूर्ण लेखन। हार्दिक बधाई

मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है..........

Yashwant Mathur ने कहा…

आपने लिखा....हमने पढ़ा
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए कल 25/04/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
धन्यवाद!

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

विचारणीय भाव.....

Anita ने कहा…

ना लीक पर
और ना लीक से हटकर
कुछ भी तो नहीं रहा पास मेरे
ना कुछ कहना
ना कुछ सुनना

कभी कभी ऐसी भाव दशा से अनूठी सूझ मिलती है..सराहनीय प्रस्तुति..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मौजूदा हालात को लिखा है .. आक्रोश लिखा है ...

India Darpan ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

चांदनी (निरुपमा) ने कहा…

i must say shabdheen kar diya aapne.....behad khoobsoorat rachna.

कविता रावत ने कहा…

बहुत सही चिंतन ...

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

बहुत खूब ...ज़ोरदार अभिव्यक्ति