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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

सुन्न

जब सुन्न हो जाता है कोई अंग
महसूस नहीं होता कुछ भी
न पीड़ा न उसका अहसास
बस कुछ ऐसी ही स्थिति में
मेरी सोच
मेरे ह्रदय के स्पंदन
सब भावनाओं के ज्वार सुन्न हो गए हैं

अंग सुन्न पड़ जाए तो

उस पर दबाव डालकर
या सहलाकर
या सेंक देकर
रक्त के प्रवाह को दुरुस्त किया जाता है
जिससे अंग चलायमान हो सके
मगर
जहाँ मन और मस्तिष्क
दोनों सुन्न पड़े हों
और उपचार के नाम पर
सिर्फ अपना दम तोड़ता वजूद हो
न खुद में इतनी सामर्थ्य
कि  दे सकें सेंक किसी आत्मीय स्पर्श का
न ऐसा कोई हाथ जो
सहला सके रिश्ते की ऊष्मा को
या आप्लावित कर सके
रिक्तता को स्नेहमयी दबाव से
फिर कैसे संभव है
खुद -ब -खुद बाहर आना
सूने मन के , तंग सोच के
सुन्न पड़े दायरे से ...............

17 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आत्मीयता ही इस पक्षपात में ऊर्जा ला सकती है।

Anita ने कहा…

संभव है..और सम्भव ही नहीं यह तो हो ही रहा है..सुन्न होने का अहसास होते ही सब सचेत होने लगता है...

अर्शिया अली ने कहा…

मन को छू जाने वाले भाव।
बधाई।
............
एक विनम्र निवेदन: प्लीज़ वोट करें, सपोर्ट करें!

yashoda agrawal ने कहा…

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 27/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

सदा ने कहा…

सुन्‍न पड़े दायरे ..............बहुत सही कहा आपने ....

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

इसी आशा के साथ कि सुन्न हुए हिस्सों पर वक्त ही महरम बन कर काम करे तो करे ...गहन भाव लिए हुए लेखनी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मुश्किल तो है .....पर खुद को निकालना पड़ता है इस दायरे से .... अपनी ही सोचों की ऊर्जा से , भावभीनी अभिव्यक्ति

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति!
साझा करने के लिए धन्यवाद!

Neelima ने कहा…

BEHTAREEN PESHKASH

Neelima ने कहा…

BEHTAREEN PESHKASH

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

Kailash Sharma ने कहा…

तलाश है ऐसे स्पर्श की जो सुन्न अंग में ऊर्जा प्रस्फुटित कर सके..अंतस को छूती रचना..

Brijesh Singh ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना! मेरी बधाई स्वीकारें।
कृपया यहां पधार कर मुझे अनुग्रहीत करें-
http://voice-brijesh.blogspot.com

रश्मि शर्मा ने कहा…

सुन्‍न पड़े दायरे..कैसे पाटे हम

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

वाह बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति | आभार

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

Nidhi Tandon ने कहा…

सुन्दर..हर संवेदनशील व्यक्ति का यही हाल है.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

तुम्हारी रचनाएँ कुछ कमेंट्स के मोहताज नहीं ........... जब भी पढ़ती हूँ - ठिठक जाती है दृष्टि,सोच .... बहुत कुछ स्पष्ट होता है,जिसे समझा जा सकता है .... उसके असर को हुबहू व्यक्त करना मुश्किल होता है कई बार