पेज

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

शनिवार, 9 सितंबर 2017

अँधा युग

गोली और गाली
जो बन चुके हैं पर्यायवाची
इस अंधे युग की बनकर सौगात
लगाते हैं ठिकाने
बडबोली जुबान को

तुम , तुम्हारी जुबान और तुम्हारी कलम
रहन है सत्ता की
नहीं बर्दाश्त सत्ता को कलम का अनायास चल जाना
बन्दूक की निकली गोली सा
गर करोगे विद्रोह तो गोली मिलेगी
और मरने के बाद गालियों के फूलों से सजेगी तुम्हारी राख

आमूलचूल परिवर्तन आ चुका है हवाओं में
अब नहीं बहा करती हवा
पूरब से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण
अब हवाएँ बहती हैं ऊपर से नीचे
आग उगलती हुईं, झुलसाती हुईं , मिटाती हुईं

ये नया युग है
नाम है अँधा युग
यहाँ जरूरत है ऐसे ताबेदारों की
जो फूँक से पहाड़ उड़ा दें
जो दस्तावेजों से हकीकत मिटा दें
जो देशभक्त को गद्दार बता दें
आओ , नवाओ सिर
कि कलम हो जाओ उससे पहले...
तुम थोथे चने हो
निराश हताश जंगल के बिखरे तिनके
कोई संगठित बुहारी नहीं
जो बुहार ले कूड़े करकट के ढेर को

सांत्वना के शब्द ख़त्म हो चुके हैं शब्दकोशों से
अब तुम तय करो अपना भविष्य
प्रतिमाएं स्थापित करने का युग है ये
शब्दों के कोड़ों से अक्सर उभर आते हैं नीले निशान
बच सको तो बच के रहना
ये वक्त न प्रतिशोध का है न प्रतिरोध का

दानव मुँह फाड़े खड़ा है
दाढ़ों में फँसने को हो जाओ सज्ज



ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है।इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के शेयर, नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
©वन्दना गुप्ता vandana gupta  

4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (10-09-2017) को "चमन का सिंगार करना चाहिए" (चर्चा अंक 2723) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar ने कहा…

विचारोत्तेजक रचना

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत जरूरी है लिखना। सटीक।

Pushpendra Dwivedi ने कहा…

waah bahut khoob avismarneey rachna




http://www.pushpendradwivedi.com/%E0%A5%9E%E0%A4%BF%E0%A5%9B%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA/