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बुधवार, 22 दिसंबर 2010

अछूत हूँ मैं

तुम्हारे दंभ को हवा नहीं देती हूँ
तुम्हारी चाहतों को मुकाम नहीं देती हूँ
अपने आप में मस्त रहती हूँ
संक्रमण से ग्रसित नहीं होती हूँ
तुम्हारी बातों में नहीं आती हूँ
बेवजह बात नहीं करती हूँ
तुम्हारे मानसिक शोषण को
पोषित नहीं करती हूँ
कतरा कर निकाल जाते हैं सभी
शायद इसीलिए अछूत हूँ मैं

27 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

आदरणीय वन्दना जी
नमस्कार !
...बहुत कुछ कहती आपकी रचना बेहतरीन पोस्ट
अन्तिम पंक्ति न जाने क्या क्या कह गयी। बहुत ही सुन्दर।

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι ने कहा…

अच्छी अभिव्यक्ति , बधाई।

वाणी गीत ने कहा…

इसलिए अछूत हो जाती है महिलाएं ...!
शानदार अभिव्यक्ति !

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

वंदना जी नारी की दृढ़ता हो आपने बखूबी और सहज शब्दों में व्यक्त किया है.. अच्छी कविता है..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दूसरों को छू लेने की चाह ही हमें अछूत बना देती है।

JAGDISH BALI ने कहा…

बहुत उम्दा !

monali ने कहा…

Salute to ol those ppl who u kept in ur mind while writing these lines.. its really tough to live ur life on ur own terms... i hope u r one of dem.. keep writing :)

Rajiv ने कहा…

वंदना जी,नमस्कार.
आपकी नई रचना "अछूत हूँ" मैंने पढ़ी.वाकई संवेदनापूर्ण भावों से भरी यह एक बेबाक रचना है."तुम्हारी बातों में नहीं आती हूँ". आज तो समय आ गया है कि बेवजह के शोषण से स्वयं को अलग किया जाये.चाहे कोई कुछ भी समझे. मन में बस गई यह रचना.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

haan tab to achhut hona hi hai...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

sundar bhav....
abhivyakti aur bhi achchhi..

shekhar suman ने कहा…

क्या कहूं...
शायद शब्द ख़त्म हो गए हैं मेरेपास...:)
बेहतरीन...

हाँ मुसलमान हूँ मैं.. ..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत गहन अभिव्यक्ति ...हाँ में हाँ नहीं मिलाई तो अछूत ही होना हुआ न ..

Suman Sinha ने कहा…

बहुत दृढ़ता है ... अछूत की क्या बात !

अनुपमा पाठक ने कहा…

बहुत कुछ कहती सुन्दर अभिव्यक्ति!

Sunil Kumar ने कहा…

"अछूत" कई अर्थों को वयां करती हुई रचना , बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

सुन्दर सन्देश देती हुई!
प्रेरक रचना के लिए बधाई!

nivedita ने कहा…

ये स्वाभिमान बहुत अच्छा लगा ,बधायी।

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी अभिव्यक्ति।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर रचना जी धन्यवाद

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

बहुत सुन्दर, बेहतरीन रचना वन्दना जी !

राजेश उत्‍साही ने कहा…

अछूत नहीं पवित्र

धीरेन्द्र सिंह ने कहा…

सच है एकदम, एक-एक शब्द व्यक्तित्व की इस दृढता को प्रदर्शित कर रहा है।

रंजना ने कहा…

ऐसी महिलायें तो अस्पृश्य हो ही जाती हैं...सत्य कहा...

मार्गदर्शन करती प्रेरक अति प्रभावशाली अभिव्यक्ति....वाह !!!

POOJA... ने कहा…

ये पढ़कर तो मुझे भी लगना लगा कि मैं भी अछूत हूँ...
शुक्रिया... बहुत प्यारी रचना...

mahendra verma ने कहा…

दृढ़ इच्छाशक्ति को अभिव्यक्त करती बहुत अच्छी रचना।

muskan ने कहा…

Bahut Khubsurat Abhivyakti.

venus****"ज़ोया" ने कहा…

Vndna ji...aapka likhne ka andaaz....vakiye kmaal he...neend...aur andaaz ye khaas pasnd aayaa mujhe
aapke nye saal ki shubhkaamnaaye..:)
take care