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सोमवार, 21 मार्च 2011

उदास हूँ मैं………

अब न तुम्हारी याद
तुम्हारा ख्याल
और ना ही तुम
कोई नही होता
आस पास मगर
फिर भी
उदास हूँ मैं………


ना कोई काँटा
ना कोई टीस
ना कोई चाहत
अब पांव पसारती है
फिर भी
उदास हूँ मैं………


न कोई सपना
आंखो मे सजता है
ना कोई अरमान
दिल मे जगता है
ना कोई प्रीत
सहलाती है
मगर
फिर भी
उदास हूँ मैं………

40 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मन में आशाओं को बहने दीजिये।

Rakesh Kumar ने कहा…

ये मन बड़ा पाजी है जी .आप तो सत्-चित -आनन्द का ही तो अंश हैं.फिर यह उदासी कैसी ?अभी होली का खुमार उतरा ही नहीं और साँवरिया के रंग में रंगी आप अब उदास ?
फिर से एक बार 'बिनु सत्संग बिबेक न होई' पर आ जाईये.सब उदासी छंट न जाये तो कहना.

अमि'अज़ीम' ने कहा…

बहुत अच्छी रचना, दीदी...

अमि'अज़ीम' ने कहा…

बहुत अच्छी रचना, दीदी....

अमि'अज़ीम' ने कहा…

दीदी,बहुत अच्छी रचना..

यशवन्त माथुर ने कहा…

बेहतरीन!

मेरे भाव ने कहा…

न कोई सपना
आंखो मे सजता है
ना कोई अरमान
दिल मे जगता है
ना कोई प्रीत
सहलाती है
मगर
फिर भी
उदास हूँ मैं………

उदासी का कारण भी निगोड़ी प्रीत ही है. शुभकामना.

वाणी गीत ने कहा…

इतना सब कुछ नहीं है तो मन उदास होगा ही ना ..

Manpreet Kaur ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना है जी ! बहुत ही अच्छा पोस्ट है आपका ! हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर आये !
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संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना होली के मौके पर !
आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं !

रश्मि प्रभा... ने कहा…

aadat jo thi...

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी,

ऐसे उदास न रहो......हंसो, बोलो राज़ दिल के खोलो

मनोज कुमार ने कहा…

कभी-कभी यूं ही उदास रहने को मन करता है।
इसके बाद तो जीने की इच्छा और बढ जाती है।
मुझे तो ऐसा ही लगता है। और ऐसी मनःस्थिति में मैं ऐसी ही कविता लिखता।
मेरे मन को छू गई यह रचना।

रजनीश तिवारी ने कहा…

फिर भी
उदास हूँ मैं………

kabhi kabhi aisi hi hoti hai ye udasi. bahut achchi rachna. shubhkamnayen.

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

....क्यों न उदासी की तुलना काले बादलों से की जाए वंदना!...जो जब तक छंट नहीं जाते,ऐसा लगता है कि अब आगे कुछ भी नही है!...लेकिन बादल छंट ही जाते है और सुनहरी धूप फिर खिल उठती है!...बहुत सुंदर, दिल को छू लेने वली रचना!

धीरेन्द्र सिंह ने कहा…

कितनी गहराई से याद आ उठी है कि यह समझना मुश्किल हो गया है कि कोई याद भी आ रहा है। प्रेम की स्वीकारोक्ति की यह महत्तम ऊंचाई है।

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

prem ke jab karan nahi honge udasi hogi... udasi tabhi hogi jab prem hoga... sundar kavita...

mahendra verma ने कहा…

जीवन में संतुलन के लिए उदासी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी प्रसन्नता।
सुंदर भावपूर्ण रचना।

होली पर्व की अशेष हार्दिक शुभकामनाएं।

Dorothy ने कहा…

दिल को गहराई से छू लेने वाली खूबसूरत रचना. आभार.
सादर,
डोरोथी.

Udan Tashtari ने कहा…

भावपूर्ण..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

अब न तुम्हारी याद
तुम्हारा ख्याल
और ना ही तुम
कोई नही होता
आस पास मगर
फिर भी
उदास हूँ मैं……
--
नाजुक शेरों से सजी मार्मिक अभिव्यक्ति!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 22 -03 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.uchcharan.com/

राज भाटिय़ा ने कहा…

उदासी से भरी लेकिन अच्छी लगी आप की कविता, धन्यवाद

अजय कुमार ने कहा…

कुछ न होना भी तो उदासी का कारण हो जाता है

Shah Nawaz ने कहा…

बड़ी ख़ूबसूरती के साथ भावों को समेटा है आपने इस रचना में... बहुत खूब!

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

भावपूर्ण रचना .....

प्रेम की ऊंचाई में बहुत कुछ न होते हुए भी 'उदासी' में सब कुछ है | दूरी का आभास है , दूरी नहीं !

Sriprakash Dimri ने कहा…

उदास मन ..होली के रंगों से अछुता...बहुत ही सुन्दर रचना....

Anand Dwivedi ने कहा…

कहीं उदासी का कारण इतना निर्विकार हो जाना तो नही है....इतनी तटस्थता ...इतना निस्पृह भाव........न कोई अरमान दिल में जगता है....न कोई प्रीत सहलाती है
न कोई कांटा न कोई टीस
आखिर ये उदासी क्यूँ ????? बहुत सुन्दर रचना वंदना जी ...पहलीबार आपको पढ़ रहा हूँ और बिना लागलपेट के कह रहा हूँ कि आपको पढना सुखद है, धन्यवाद!!

Akhil ने कहा…

bahut bahut sundar abhivyakti...kabhi kabhi aisa bhi hota hai..

baabusha ने कहा…

I would recommend u to taste this feeling completely.It is , I believe, one of the major ingredients of world's best creations.
Regards.

सदा ने कहा…

बेहतरीन शब्‍द रचना ।

Sadhana Vaid ने कहा…

जग जीवन से असम्प्रक्तता इसी उदासी के परिणामस्वरूप है ! बहुत ही सुन्दर एवं गहन रचना ! बधाई एवं शुभकामनायें !

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

ह्रदय की रिक्तता को व्यक्त करती सुन्दर कविता ।

M VERMA ने कहा…

शायद यह अंतर्द्वन्द का सोपान है

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

man khali khali hai na is liye udas hai...ise kaise bhi ehsaason se bhara rakhiye. :) and keep smile.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

उदासी में भी एक मज़ा है , देखिये इस शेर में:-

उदासी तबीयत पे छा जायेगी.
उन्हें जब मेरी याद आ जायेगी.

अब बताइए,सही कहा था न मैंने.

GirishMukul ने कहा…

मर्म को छू गई
ये पंक्तियां
ना कोई काँटा
ना कोई टीस
ना कोई चाहत
अब पांव पसारती है
फिर भी
उदास हूँ मैं…

GirishMukul ने कहा…

शायद पूरी कविता

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना ! कभी कभी मन यूँही उदास हो जाता है ...

सुधाकल्प ने कहा…

बहुत अच्छे भाव व उत्तम अभिव्यंजना शैली है ।
सुधा भार्गव