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गुरुवार, 3 मार्च 2011

पता नहीं क्यों…………

पता नहीं क्यों
बसते हो तुम मुझमे
कितनी बार चाहा
तोड़ दूँ चाहत का भरम
हर बार तुम्हारी चाहत
मुझे कमजोर कर गयी

पता नहीं क्यों

इतना चाहते हो मुझे
कितनी बार चाहा
भूल जाओ तुम मुझे
हर बार तुम्हारा प्यार
मंजिल से मिला गया

पता नहीं क्यों

याद करते हो मुझे
कितनी बार चाहा
लगा दूँ ताला 

दिल के दरवाज़े पर
हर बार तुम्हारी

भीगी नज़रें
भिगो गयीं मुझे
और मैं 

तेरे प्रेम के आगे
खुद से हार गयी

45 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर ने कहा…

बहुत ही प्यारी कविता.

सादर

आशुतोष ने कहा…

प्यार में समर्पण को दर्शाती अच्छी कृति..
बधाइयाँ..

वाणी गीत ने कहा…

दिल के दरवाजे पर ताले कहाँ लगते हैं ...जिसको भुलाने में इतनी मशक्कतें हैं ,भुलाये ही क्यों !
सुन्दर !

rashmi ravija ने कहा…

एकदम प्यार में डूबी रचना है यह तो....ख़ूबसूरत :)

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

बेहद सुन्दर कविता.. प्रेम में खुद से हारना प्रेम को पाना है..

सदा ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द इस रचना के ...बधाई ।

सलीम ख़ान ने कहा…

hriday ko touch kar gayi ye rachnaa !

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

खुद से हार कर ही दूसरो से जीतते है
आभार

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'हर बार तुम्हारी

भीगी नज़रें

भिगो गयीं मुझे

और मैं

तेरे प्रेम के आगे

खुद से हार गयी '

ह्रदय की कोमल भावनावों की सुन्दर अभिव्यक्ति

POOJA... ने कहा…

वाह...
प्रेम से परिपूर्ण, प्रेम की भावनाओं से प्रेरित रचना...

Sunil Kumar ने कहा…

कितनी बार चाहा
लगा दूँ ताला
दिल के दरवाज़े पर.
खुबसूरत अहसास को खुबसूरत अल्फ़ाज देना तारीफ़ के क़ाबिल है |शुभकामनायें ...

राजेश उत्‍साही ने कहा…

पता नहीं क्‍यों ....।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रेम की शक्ति यही है संभवतः।

Rakesh Kumar ने कहा…

"उधो ! मन नाही दस बीस ,एक हुतो सो गयो
श्याम संग .." दिल के दरवाजे पे ताला कैसे लग पायेगा ,जब ताले की कुंजी ही उसके पास है.कितना सुखद हारना है आपका .
भक्ति और भावों की सुंदर अभिव्यक्ति .

Udan Tashtari ने कहा…

सुन्दर समर्पित भाव...

Mithilesh dubey ने कहा…

सुन्दर

क्या सच में तुम हो???---मिथिलेश

कुश्वंश ने कहा…

प्रेम का ये परिभाषा अच्छी है, गहरी अनुभूतियो से उपजे बात के लिए बधाई, आशा है और गहरी कविताये लिखेगी आप

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

वंदना जी,
एक बार फिर आपकी खूबसूरत प्रस्तुति!

मनोज कुमार ने कहा…

आंसुओं में बहुत ताकत है .....

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर रचना धन्यवाद

OM KASHYAP ने कहा…

bahut hi sunder prempurn kavita
badhai

Atul Shrivastava ने कहा…

''किसी को दिल न देने की कसम हर बार खाई है,
मगर मजबूर है, हमसे यही हर बार होता है।''
प्‍यार की बेहतरीन रचना।
बधाई हो आपको।

Fauziya Reyaz ने कहा…

bilkul sach....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

पता नहीं क्यों
याद करते हो मुझे
कितनी बार चाहा
लगा दूँ ताला
दिल के दरवाज़े पर
हर बार तुम्हारी
भीगी नज़रें
भिगो गयीं मुझे
और मैं
तेरे प्रेम के आगे
खुद से हार गयी
--
सुन्दर रचना!
विशेषज्ञों द्वारा इसी को तो प्यार का नाम दिया गया है!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

पता नहीं क्यों
याद करते हो मुझे
कितनी बार चाहा
लगा दूँ ताला
दिल के दरवाज़े पर
हर बार तुम्हारी
भीगी नज़रें
भिगो गयीं मुझे
और मैं
तेरे प्रेम के आगे
खुद से हार गयी...mann kee is sthiti ko bahut pyaare shabd diye hain

amrendra "amar" ने कहा…

हर बार तुम्हारी

भीगी नज़रें

भिगो गयीं मुझे

और मैं

तेरे प्रेम के आगे

खुद से हार गयी '

प्यार में डूबी, बहुत ही प्यारी कविता.

saanjh ने कहा…

yes dear...prem ke aage khud se haarna hi padta hai....

bohot sundar kavita, bheegi si :)

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी,

प्रेम में ऐसी ही शक्ति होती है.....उसका बंधन बड़ा प्रगाड़ होता है.....तोड़ने से भी नहीं टूटता|

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सच ..पता नहीं क्यों होता है ऐसा :):)

बहुत कोमल भावों को समेटे अच्छी रचना

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (05.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

V!Vs ने कहा…

bahut mast likha h.

V!Vs ने कहा…

'kitni baar chaha................' bala para kuchh jyada hi pasand aaya.

nivedita ने कहा…

समर्पण के भावों की बेहतेरीन अभिव्यक्ति ......
बहुत खूब !

ehsas ने कहा…

यही तो प्यार है। सुन्दर कविता।

Dr Varsha Singh ने कहा…

तुम्हारी
भीगी नज़रें
भिगो गयीं मुझे
और मैं
तेरे प्रेम के आगे
खुद से हार गयी...

बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए बधाई।

धीरेन्द्र सिंह ने कहा…

पता नहीं क्यों...एक अतिविशाल शब्द, अतिव्यापक कथ्य और उसपर आपकी कविता के भाव, दिल के कोमल घावों को शालीनता से उकेर दे रहे हैं।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर.....एक-एक शब्द भावपूर्ण
कविता की तारीफ जितनी की जाए कम है.

Amit K Sagar ने कहा…

प्यार सी प्यारी रचना.
जारी रहें.
-
व्यस्त हूँ इन दिनों

Kailash C Sharma ने कहा…

प्रेम में सम्पूर्ण समर्पण को रेखांकित करती बहुत ही सुन्दर रचना..

anupama's sukrity ! ने कहा…

प्रेम की शक्ति को दर्शाती हुई बहुत सुंदर अभिव्यक्ति -

Patali-The-Village ने कहा…

बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए बधाई।

mahendra verma ने कहा…

‘भीगी पलकें‘ ईश्वर का उपहार है।
बहुत प्यारी कविता।

रजनीश तिवारी ने कहा…

करना था इंकार, मगर इकरार तुम्हीं से कर बैठे... ना ना करते ...!बहुत ही भावपूर्ण और सुंदर रचना के लिए बधाई !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

प्रेम में हारना जीतना होता है ... गहरे एहसास समेत कर लिखी रचना ...

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

प्रेममयी आपकी कविता बहुत सुन्दर... हर बार आपकी भीगी पलकों .... बहुत सुंदर