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शनिवार, 19 मई 2012

अछूत कन्या नही हूँ मैं...........

कुछ लिखा और मिटा दिया


आज तेरी याद ने यूँ हरा दिया

ओ अजनबी……… कौन हो तुम?





मैने तो मोहब्बत को झाडा पोंछा और सुखाया 

मगर तेरे अश्कों ने ही उसे है रुसवा किया

तेरी अजनबियत को सांसो मे उतारा

फिर भी ना तूने मुझे इक बार पुकारा

ओ अजनबी……… कौन हो तुम?


देख तो सारे सफ़े तेरी नज़र किये जिसने

कैसे ना उसकी आह ने चिकोटी भरी

कैसे ना तुझे वो तस्वीर दिखी……

यूँ भी कभी अछूता रहा जाता है………

अछूत कन्या नही हूँ मैं...........


मेरे पन्नो को गुलाबी कर दो ना.......ओ अजनबी 

21 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

इन पन्नों को गुलाबी करने वाला मनमीत सहज सुलभ क्यों नहीं होता?

मुकेश पाण्डेय चन्दन ने कहा…

sundar kavita !
ek stree ke manobhavo ko vyakt karte hui .......

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...आभार

rashmi ravija ने कहा…

बहुत ही भावपूर्ण कविता

सदा ने कहा…

अनुपम भाव संयोजन लिए ...उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तु‍ति।

Shanti Garg ने कहा…

बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

पाठक को भी गुलाबी करती कविता..

रश्मि प्रभा... ने कहा…

प्यार भरी चाह

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

काश ऐसा हमसफर सबको मिले..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरत ख़्वाहिश

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

एक चाह या एक हसरत या एक ख्वाहिश जो है ....पर है बहुत मिठ्ठी ....

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


इंडिया दर्पण
की ओर से आभार।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

कोई कर जाएगा गुलाबी तेरा पन्ना पन्ना
नाम से किसी को पुकारो तो सही

Rajesh Kumari ने कहा…

एक खूबसूरत चाह ..सुन्दर एहसासों से सजी रचना

lokendra singh rajput ने कहा…

खूबसूरत कविता....

veerubhai ने कहा…

मुझे भी गुलाबी कर दो प्रीत से भर दो ...अच्छी भाव व्यंजना ..
कृपया यहाँ भी पधारें -
ram ram bhai
http://veerubhai1947.blogspot.in/
रविवार, 20 मई 2012
कब असरकारी सिद्ध होता है एंटी -बायटिक : ये है बोम्बे मेरी जान (तीसरा भाग ):

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

choom kar mad bhari aankhon se gulabi kagaj..kisne bheja hai mujhe likhkar gulabi kagaj...gulab kagaj na bheja na sahi gulab jaisa pyar hee de de..aapkee rachnaaon aapki khoji pravriti kee parichayak hai..hardam kuch accha sa ..kuch naye pan aaur tajgi ke sath..sadar badhayee aaur sadar amantran ke sath..mere blog ko acchoota na banayiye..muddaton baad sahi kabhi mere blog per bhee aa jayiye

इमरान अंसारी ने कहा…

सुभानाल्लाह बहुत ही खूबसूरत ।

M VERMA ने कहा…

बहुत खूब
शायद पन्ने पहले से ही गुलाबी हैं

Anjani Kumar ने कहा…

mam , आपका शिकायत करने का भी अंदाज़ निराला है.. खासकर पन्नों को गुलाबी करने वाली बात
बहुत सुन्दर प्रस्तुति