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गुरुवार, 21 जून 2012

जो होती अलबेली नार




जो होती अलबेली नार 

करती साज श्रृंगार 

प्रियतम की बाट जोहती

नैनो मे उनकी छवि दिखती 

कपोलों पर हया की लाली दिखती 

अधरों पर सावन आ बरसता 

माथे पर सिंदूरी टीका सजता 

जो प्रियतम के मन मे बसता 

जीवन सात सुरों सा बजता  





 जो होती अलबेली नार
तिरछी चितवन से उन्हें रिझाती
नयन बाण से घायल कर जाती
हिरनी सी चाल चल जाती
मतवारी गजगामिनी कहाती 
प्रियतम के मन को भा जाती 
गाता जीवन मेघ मल्हार





जो होती अलबेली नार
बिना हाव भाव के भी
प्रियतम के मन में बस जाती 
अपनी प्रीत से उन्हें मनाती
उनकी सांसें बन जाती 
जीवन रेखा कहलाती 
पाता जीवन पूर्ण श्रृंगार 


जो होती अलबेली नार...............

17 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वाह...
छंदबद्ध रचना!
बहुत सुन्दर!

सदा ने कहा…

जीवन रेखा कहलाती ... बहुत खूब ...

kunwarji's ने कहा…

सुन्दर भाव....

कुँवर जी,

रविकर फैजाबादी ने कहा…

प्रस्तुति चर्चा मंच पर, मचा रही हडकम्प ।

मित्र नहीं देरी करो, मार पहुँचिये जम्प ||

--

शुक्रवारीय चर्चा मंच

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुन्दर..

इमरान अंसारी ने कहा…

बहुत ही सुन्दर भावो से सजी ये पोस्ट लाजवाब है।

rashmi ravija ने कहा…

सुन्दर रचना ..

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

शब्दों की खूबसूरत रचना

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

क्या करें, सौन्दर्य सर चढ़कर बोलता है..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बढ़िया :):) फिर कैसे रिझाया ?

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

सुंदर, कोमल और रेशमी शब्द - भावों ने विभोर कर दिया, वाह !!!!!!!!!!!!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

जो होती अलबेली नार
बिना हाव भाव के भी
प्रियतम के मन में बस जाती
अपनी प्रीत से उन्हें मनाती
उनकी सांसें बन जाती
जीवन रेखा कहलाती
पाता जीवन पूर्ण श्रृंगार .... सच्ची

Rakesh Kumar ने कहा…

अलबेली नार का सार
बहुत ही खूबसूरती से
अभिव्यक्त किया है आपने.

सोच रहा हूँ चौथे पद में भी
आप लिखतीं तो जरूर कुछ
और धारदार लिखतीं..

M VERMA ने कहा…

बहुत सुन्दर

कुछ अलग स्वर

Rajesh Kumari ने कहा…

बहुत सुन्दर अलग तरह की एक नटखट सी रचना बहुत प्यारी लगी

Surendra shukla" Bhramar"5 ने कहा…

बिना हाव भाव के भी प्रियतम के मन में बस जाती अपनी प्रीत से उन्हें मनाती उनकी सांसें बन जाती जीवन रेखा कहलाती पाता जीवन पूर्ण श्रृंगार

वंदना जी आप को ढेर सारी खुशियाँ नसीब हों और ये सारे प्यारे अलबेले गुण नारियों में आप यों ही भरती रहें ....सुन्दर
भ्रमर ५

Anjani Kumar ने कहा…

खूबसूरत अभिलाषाओं की फेहरिस्त ....
जो होती अलबेली नार