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मंगलवार, 10 जुलाई 2012

क्या हर युग में चक्रव्यूह में घिरकर ही अभिमन्यु की मौत निश्चित है ?

मेरे मन की ग्रंथियों पर
कोई नाग कुंडली मार 
शायद बैठ गया है 
तभी तो कोई ग्रंथि
खुल ही नहीं रही
तमस में कहाँ 
हाथ दिखाई देता है
फिर इस गहन 
तमस में 
कौन सी ग्रंथि टटोलूं
कौन सी गांठ खोलूं
एक रंगहीन पर्दा है
जो हटता ही नहीं 
और उसके पार भी
दिखता ही नहीं
ना दशा का पता 
ना दिशा का पता
फिर मंजिल का निर्धारण कौन करे?
ग्रंथियों के चक्रव्यूह में उलझा मन
भेदने का मार्ग ढूँढ ढूँढ हार गया 
मगर ना कोई राह मिली
क्या हर युग में चक्रव्यूह में घिरकर ही अभिमन्यु की मौत निश्चित है ?

24 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

अभिमन्यु एक कदम है ... और मृत्यु खुद में एक चक्रव्यूह है ...... मरने से पहले जी लें , वरना मरना तो है ही

रविकर फैजाबादी ने कहा…

यह है बुधवार की खबर ।

उत्कृष्ट प्रस्तुति चर्चा मंच पर ।।



आइये-

सादर ।।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

गहन अभिव्यक्ति ॥मन की छटपटाहट को दर्शाती

Kumar Radharaman ने कहा…

ऐसा मान लेने वाले की मौत ज़रूर निश्चित है। न युग एक से रहते हैं,न चक्रव्यूह।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आठवाँ द्वार भेदना कौन सिखायेगा भला..

shikha varshney ने कहा…

मौत तो होनी ही है ..तो क्यों न लड़ते हुए मरा जाये.

इमरान अंसारी ने कहा…

अभिमन्यु अगर स्वयं चक्रव्यूह चुनेगा तो शायद ये सुनिश्चित है।

Pallavi saxena ने कहा…

जीवन एक चक्रव्यूह है और हम एक अभिमन्यु जिस में घिरकर ही अभिमन्यु की मौत निश्चित है।

सदा ने कहा…

गहन भाव लिए ... उत्‍कृष्‍ट रचना

RITU ने कहा…

अभिमन्यु तो अमर है ...कैसे भूल गयीं की कृष्ण भी हैं..

RITU ने कहा…

अभिमन्यु तो अमर है ...कैसे भूल गयीं की कृष्ण भी हैं..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इन ग्रंथियों का चक्रव्यूह खुद ही तोड़ना होता है ... कोई नहीं आता साथ देने ... गहरी कविता ...

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

marna to sabko hai, chahe abhimanyu ho ya koi danav... to jee len abhimanyun ke tarah:)
behtareen!!

मुकेश पाण्डेय चन्दन ने कहा…

अभिमन्यु वीर था , परन्तु बिना पूर्ण ज्ञान के चक्रव्यूह में घुसना उसकी गलती थी . अगर इस युग के अभिमन्यु पूर्ण ज्ञान से चक्रव्यूह में जाते है , तो विजय निश्चित है ! रचना सुन्दर और गहन भाव लिए है . सादर

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

abhimanyu ko chakrvyuh ne ghera tha..chakrvyuh me abuimanyu gaya tha..lekin yahan granthiyon ne hame ghera hai...hamare seedha sada jeewan me jab granthiyon a palan prambh hua ham bekhabar gathe aaur jab granthiyan fail gayee to ye hamaari pareshani ks sabab ban gayeein..iskee rokthaam sajagta se pahle karnee thee..ab yadai nahi ho payee to phir ladte hue beergati ko prapt hona jyada acchha hoga..sadar badhayee aaur amantran ke sath

मनोज कुमार ने कहा…

अभिमन्यू अभी चालाकी नहीं सीख पाया है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

हर युग में होती रही, अभिमन्यू की मौत।
खुली चुनौती दे रहा, चन्दा को खद्योत।।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

achha sansmaran....!!

वाणी गीत ने कहा…

मन ही अभिमन्यु और मन ही चक्रव्यूह तो मन को ही कृष्ण होना होगा!

शिवनाथ कुमार ने कहा…

गहन भाव लिए सुंदर सी रचना ....
हाँ, लेकिन एक बात है कि अभिमन्यु के पास आठवां द्वार भेदने का 'ज्ञान' नहीं था तो वस्तुतः 'ज्ञान' का अभाव ही चक्रव्यूह नहीं भेद पाने का कारण है
सच्चा ज्ञान हमें हर तरह के चक्रव्यूह से छुटकारा दिला सकता है ......
साभार !!

Rajesh Kumari ने कहा…

मन ही मन के चक्रव्यूह से बाहर निकलेगा खोजते खोजते रास्ता जरूर निकलेगा ...मन की परिस्थितियों पर गहन चिंतन दर्शाती रचना बहुत खूब वंदना जी

रजनीश तिवारी ने कहा…

एक बड़ा सवाल है ये ...गहन अभिव्यक्ति

अरुन शर्मा ने कहा…

बेहतरीन रचना, गहन अभिव्यक्ति
(अरुन शर्मा = arunsblog.in)

Suresh kumar ने कहा…

गहन अभिव्यक्ति ....
सुंदर रचना ..........