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शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

बरसात के बाद शिशिर के आगमन से पहले

बरसात के बाद
जब मौसम करवट लेता है
शिशिर के आगमन से पहले
और बरसात के बाद की अवस्था
मौसम की अंगडाई का दर्शन ही तो होती है
शिशिर के स्वागत के लिए
हरा कालीन बिछ जाता है
वैसे ही
जब मोहब्बत की बरसात के बाद
जब इश्क करवट लेता है
पूर्णत्व से पहले की प्रक्रिया
मोहब्बत की सांसों को छीलकर
उसे सजाना संवारना
और पूर्णता की ओर ले जाने का उपक्रम
किसी मौसम का मोहताज नहीं होता
वहाँ मोहब्बत जब
प्रेम में तब्दील होती है
और प्रेम जब इबादत में
तब खुदाई नूर की चिलमन के उस तरफ
आगाज़ होता है एक नयी सुबह का
महबूब के दीदार से परे
उसकी रूह में उतरने का
उसके अनकहे को पढने का
उसकी चाहतों पर सजदा करने का
और मिल जाती है वहाँ
परवान चढ़ जाती है वहाँ
मोहब्बत कहो या इश्क कहो या प्रेम कहो या खुदा ............अपने वजूद से
समा जाती है मोहब्बत ..........मोहब्बत में 

बरसात के बाद शिशिर के आगमन से पहले...........…

17 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

प्यार के हर मौसमी रंग हैं आपकी कलम में

Always Unlucky ने कहा…

You have written a very informative article with great quality content and well laid out points. I agree with you on many of your views and you’ve got me thinking. 95. Fantastic publish
From India

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मुहब्बत से इबादत तक का मार्ग प्रशस्त करती सुंदर रचना

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज 28- 09 12 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....

.... आज की वार्ता में ... व्यस्तता नहीं , अर्थपूर्ण व्यस्तता आवश्यक है .... ब्लॉग 4 वार्ता ... संगीता स्वरूप.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच में तब मौसम अपनी तरंग में रहता है।

सदा ने कहा…

गहन भाव लिये हर शब्‍द बहुत कुछ कहता हुआ ... उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (29-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Udan Tashtari ने कहा…

क्या बात है...

समा जाती है मोहब्बत मोहब्बत में...

आशा जोगळेकर ने कहा…

शिशिर के आगमन से पहले प्यार परवान चढ रहा है ।

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

लेकिन ये स्थिति आने से पहले सब कुछ विसर्जन करना पड़ता है .पतझड़ सा झड जाना होता है .पत्ते जाते भी रंग बदलते हुएँ हैं .यहाँ (कैंटन ,मिशिगन )तो इन दिनों रंगों का मेला लगा है .पतझड़ ख्यात है यहाँ का .फूलों वाले वृक्ष झर झर कर झड़ते ज़रूर हैं लेकिन रंगों की एक ऐसी मनोहारी छटा बिखेरते हैं जो मोहब्बत सी बस जाती है दिलो दिमाग में .बेहद बढ़िया रचना .

जख्म जो फूलों ने दिए पर

इमरान अंसारी ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर पोस्ट।

expression ने कहा…

मोहब्बत के मौसम...
मौसम से जुड़ी मोहब्बत.....
बहुत सुन्दर वंदना जी.

अनु

संध्या शर्मा ने कहा…

आज 29/09/2012 को आपकी यह पोस्ट ब्लॉग 4 वार्ता http://blog4varta.blogspot.in/2012/09/4_29.html पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

India Darpan ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

Vinay Prajapati ने कहा…

very very nice :)

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Rakesh Kumar ने कहा…

आपके उमड़ते जज्बात
कह जाते हैं गहन सी बात

सुन्दर प्रस्तुति.

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

प्यार ही प्यार ...और ऊपर से उसका खुमार ...वाह बहुत खूब