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बुधवार, 21 सितंबर 2016

ये कैसा हाहाकार है

ये कैसा हाहाकार है

कुत्ते सियार डोल रहे हैं
गिद्ध माँस नोंच रहे हैं
काली भयावह अंधियारी में
मचती चीख पुकार है
ये कैसा हाहाकार है

चील कौवों की मौज हुई है
तोता मैना सहम गए हैं
बेरहमी का छाया गर्दो गुबार है
ये कैसा हाहाकार है

काल क्षत विक्षत हुआ है
धरती माँ भी सहम गयी है
उसके लालों पर आया 
संकट अपार है
ये कैसा हाहाकार है

अत्याचार का सूर्य उगा है
देख , दिनकर का भी शीश झुका है
दहशतगर्दों ने किया अत्याचार है
ये कैसा हाहाकार है

शेर चीते सो रहे हैं
गीदड़ भभकी से क्यों डर रहे हैं
कैसी चली उल्टी बयार है
ये कैसा हाहाकार है 
 
धरती माँ के उर में उरी का दंश उगा है

4 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

सचमच ही ...जिस तरह का हाहाकार मचा हुआ है ..वो ये तय कर रहा है कि भविष्य के गर्भ में विनाश अब ज्यादा दिनों तक खामोश नहीं रह पायेगा .हमेशा की तरह भावपूरण ....दिसम्बर बैठकी के लिए अब से हर टिप्पणी पर आपको आम्नात्रण :) :)

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 22-09-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2473 में दी जाएगी
धन्यवाद

रश्मि शर्मा ने कहा…

बहुत ही बढ़ि‍या...मर्म को छूने वाला

Anil Sahu ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति.धन्यवाद!