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गुरुवार, 9 जुलाई 2009

शब्दों का आमंत्रण

शब्दों के आमंत्रण पर
मैं बिन डोर
खिंची चली आती हूँ
शब्दों के सागर में फिर
बिन पतवार
नाव चलाती हूँ
कभी डूबती हूँ
कभी उतराती हूँ
तो कभी शब्दजाल के
भंवर में फंस जाती हूँ
शब्दों की आँख मिचोनी में
कभी शब्द विलीन हो जाते हैं
तो कभी मैं कहीं खो जाती हूँ
फिर शब्द खोजते हैं मुझको
और मैं शब्दों की चादर
ओढ़ सो जाती हूँ
शब्दों के संसार में
बिन पहचाने
शब्दों को खोजने जाती हूँ
शब्दों की गहन भाषा को
मैं बिन जाने भी
जान जाती हूँ
कभी शब्द मेरे हो जाते हैं
कभी मैं शब्दों की हो जाती हूँ
कभी शब्द मुझको छूते हैं
कभी मैं शब्दों में खो जाती हूँ
इस शब्दों के अनोखे खेल में
मैं शब्दों से लाड लड़ती हूँ
शब्दों के मीठे आमंत्रण पर मैं
बिन डोर खिंची चली आती हूँ

14 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

शब्दों के मधुर निमन्त्रण पर,
बिन डोर खिंचे सब आते हैं।
ये शब्द कभी तड़पाते हैं,
और कभी बहुत हर्षाते हैं।
शब्दों की महिमा अनन्त है,
शब्दों से मन में बसन्त है।
शब्द पिरो जाते हैं माला,
शब्दों का नही कोई अन्त है।

sada ने कहा…

कभी शब्‍द मेरे हो जाते हैं,
कभी मैं शब्‍दों की हो जाती हूं !!

बहुत ही सुन्‍दर रचना ।

M VERMA ने कहा…

और मैं शब्दों की चादर
ओढ़ सो जाती हूँ
शब्दों के संसार में
शब्दो की चादर बहुत खूबसूरती से ओढा है.
बहुत खूबसूरत

ओम आर्य ने कहा…

एक सुन्दर गीत है आपकी यह रचना...........सुन्दर

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

जो शब्दों की डोर से खीचा चला जाए, जो शब्दो की चादर ओढ़ सो जाए,और जो शब्दों से लाड लडाये वही तो सच में लेखक होता है। नए नए विषय पर लिखने में आपका जवाब नही। खूब लिखिए और जमकर लीखिए।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सुन्‍दर रचना

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुन्दर शब्दों का आमंत्रण बढ़िया भाव है

venus kesari ने कहा…

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

वीनस केसरी

venus kesari ने कहा…

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

वीनस केसरी

Prem Farrukhabadi ने कहा…

इस शब्दों के अनोखे खेल में
मैं शब्दों से लाड लड़ती हूँ
शब्दों के मीठे आमंत्रण पर मैं
बिन डोर खिंची चली आती हूँ

वंदना जी ,
बहुत कुछ कहने में समर्थ
कविता सराहनीय .बधाई!!!

‘नज़र’ ने कहा…

अति सुन्दर प्रस्तुति
---
विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

anil ने कहा…

बहुत सुन्‍दर रचना........

surender ने कहा…

वंदना जी.....
अद्भुत रचना....
excellently expressed....
plese visit my blog too if u have time...
http://shayarichawla.blogspot.com/

कंचनलता चतुर्वेदी ने कहा…

वंदना जी ,
बहुत सुन्‍दर रचना..बधाई...