पेज

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

रविवार, 12 जुलाई 2009

दिल की खोज

उदास है दिल
न जाने क्यूँ
किसे खोजता है
किसकी तलाश है
शायद ये भी अब
किसी गहरे
सागर में डूब
जाना चाहता है
शायद ये भी
सागर की तलहटी में
छुपे किसी अनमोल
मोती की तलाश में है
या फिर शायद
ये भी सागर के अंतस की
अनन्त गहराई में
खो जाना चाहता है
जहाँ खुद को पा सके
कुछ पल अपने लिए
सुकून के खोज सके
आख़िर दिल दिल ही है
कब तक सब कुछ झेलेगा
कभी तो खुद को भी टटोलेगा
कभी तो अपने को भी खोजेगा
इस दिल की पीड़ा को
कोई क्या समझेगा
दिल भी आख़िर दिल ही है
कभी तो जीना सीखेगा
कब तक खिलौना बन भटकेगा
अब तो खुद के लिए भी
एक किनारा ढूंढेगा
कहीं तो ठोर पायेगा
और तब शायद
उसका वजूद भी
उसमें ही सिमट जाएगा


14 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आशा और निराशा,
दोनों साथ-साथ चलती हैं।
अंधियारे में भी चमकीली,
किरण कोई मिलती है।।

मन में हो विश्वास तभी,
तो ठौर-ठिकाना मिलता है।
वीराने उपवन में भी तो,
फूल कभी खिलता है।।

होगा यदि अस्तित्व,
किनारा मिल ही जायेगा।
डूब गया जब पोत,
सहारा किसका वो पायेगा।।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आशा और निराशा,
दोनों साथ-साथ चलती हैं।
अंधियारे में भी चमकीली,
किरण कोई मिलती है।।

मन में हो विश्वास तभी,
तो ठौर-ठिकाना मिलता है।
वीराने उपवन में भी तो,
फूल कभी खिलता है।।

होगा यदि अस्तित्व,
किनारा मिल ही जायेगा।
डूब गया जब पोत,
सहारा किसका वो पायेगा।।

M VERMA ने कहा…

तलाश सागर की गहराई तक
बहुत खूबसूरत तलाश है मोती मिलेगा ही.

और फिर ठौर का मिलना तो तय ही है.
बहुत खूब

Nirmla Kapila ने कहा…

क्या सुन्दर अभव्यक्ति है दिल क्य है क्यों है कैसा है क्या चाहता है क्योम उदास होता है क्यों खुश होता है ये शायद ये खुद भी नहीं जानता तभी तो इसे हर वक्त तलाश रहती है किसी न किसी प्रश्न की बहुत बदिया रचना बधाई

Prem Farrukhabadi ने कहा…

अब तो खुद के लिए भी
एक किनारा ढूंढेगा
कहीं तो ठोर पायेगा
और तब शायद
उसका वजूद भी
उसमें ही सिमट जाएगा

वंदना जी ,
बहुत खूबसूरत ख्याल.दिल से बधाई !!!

सचिन मिश्रा ने कहा…

Bahut badiya

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा रचना!

awaz do humko ने कहा…

bahut achcha

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

बडे दिल से लिखे है दिल के जज्बात।

सुशील कुमार ने कहा…

अति सुन्दर। क्या लिखा है वंदना आपने। ऐसे लिखते रहें।

‘नज़र’ ने कहा…

बहुत अच्छी कविता है
---
श्री युक्तेश्वर गिरि के चार युग

surender ने कहा…

दिल भी आख़िर दिल ही है
कभी तो जीना सीखेगा
nicely written vandana ji....
dil ko chhu gaya...
keep rolling...

HEY PRABHU YEH TERA PATH ने कहा…

बहुत अच्छी कविता है * * * * * * (five star to your best poem)
आभार/मगलभावो के साथ
मुम्बई टाइगर
हे प्रभु तेरापन्थ खान

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

ye khoj jaldi se jaldi poori ho.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }