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सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

हाट में बिकते दिल देखो

प्यार के निराले खेल देखो
हाट में बिकते दिल देखो

प्रेम प्रतीक की बेकदरी देखो
कोई तोड़ देती है
कोई फेंक देती है
होता है बुरा हाल तब
जब किसी और को दे देती है
गुलाब की आई शामत देखो
हाट में बिकते दिल देखो


वादों की बदहाली देखो
पब, रेस्तरां, नाईट क्लब में जाते हैं
जोड़े नाचते गाते हैं
कसमें वादे भी करते हैं मगर 
प्रेम इज़हार एक से करते हैं
जाते दूजे के साथ हैं
और तीसरे के साथ निकलते हैं
वैलेन्टाइन डे की चाल मतवाली देखो
ये एक हाथ से बजती ताली देखो
प्रेम की छटा निराली देखो




मोल भाव यहाँ भी होता है
गिफ्टों से प्रेम तोला जाता है
महंगे गिफ्ट वाला ही 
कन्या का सानिध्य पाता है 
प्रेम का अजब खेल है ये
एक ही दिन में सिमट जाता है
किसी का दिल टूट जाता है
किसी का दिन बन जाता है
कोई धोखा खाता है
तो कोई हँसता गाता है
मगर अमर प्रेम ना कोई पाता है
ये झूठे प्रेम की क्रांति देखो
मन में बैठी भ्रान्ति देखो
प्रेम की नयी परिभाषा देखो
झूठी इक अभिलाषा देखो


वैलेन्टाइन डे के नाम पर 
मिटती मर्यादा देखो
झूठ फरेब की नयी दुनिया देखो
जानते बूझते हाथ जलाते देखो
इक पल की चाह में
खुद को बहलाते देखो
ये आडम्बर के खोल में लिपटी
आधुनिक कहलाती दुनिया देखो
बाहरी संस्कृति से प्रेरित 
बहकती युवा पीढियां देखो
ये आधुनिकता का दंभ भरती
इधर उधर भटकती दुनिया देखो
प्यार के निराले खेल देखो
हाट में बिकते दिल देखो

38 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

यही आज का दृष्य है..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

प्रेम प्रतीक की बेकदरी देखो
कोई तोड़ देती है
कोई फेंक देती है
होता है बुरा हाल तब
जब किसी और को दे देती है
गुलाब की आई शामत देखो
हाट में बिकते दिल देखो
--
बहुत सही फटकार लगाई है आपने इन दिल वालों को!
--
आज के दिन यह बहुत जरूरी भी था!
आपकी यह पोस्ट पढ़कर
कुछ लोगों की आँखें तो खुल ही जाएँगी!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

अब मेरे सारे ब्लॉग्स फिर से blogspot.com/ पर आ गये हैं!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सोने का प्रेम, प्रेम का सोना।

Rakesh Kumar ने कहा…

Pyaar ke nirale khel dekho,Haat me bikte dil dekho....
Wah! Vandana ji wah!,kitane jawan dilo ko aaghat pahunchaya hai aapne,lekin schchaai ka aaina rakh kar.Is aaine me yadi sub zhank payen to asli pyaar ka matlab samaz me aa sakega.
Samaj utthan ki bhavana se prarit is kavita ke liye bahut bahut bandhai.

saanjh ने कहा…

oh my gosh vandana ji....kya nazm likhi hai....mindbender!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

valentine day to bahana hai khuleaam kuch bhi karne ka ...

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

प्रेम दिवस को सभी को प्रण लेना चाहिए की प्रेम निस्वार्थ हो!

निर्मला कपिला ने कहा…

बहकती युवा पीढी देखो। सही कहा। एक दिन का प्रेम ही तो रह गया है आजकल। अच्छी रचना। बधाई।

Rakesh Kumar ने कहा…

@>> Aadarniya Surenderji,
"prem divas" per hi kyun har din kyun nahi.Niswarth prem ke liye kya kisi
divas vishesh ki aavasayakta hoti hai.'Prem divas' ke naam per kya kya nahi ho raha hai yuva varg me ki "prem ko bhi haat me bikana pad raha hai"
"Prem na badi uupje,prem na haat bikaay,raja praja jehi ruche,sheesh
dehi le jaye"
Prem ke liye to bhai 'sheesh' yani apne ahankar ka balidaan karna padega pehle.

यशवन्त माथुर ने कहा…

बिलकुल सही और सोचने को मजबूर करती कविता.

सादर

abhi ने कहा…

ये हमारे आधुनिक युवा वर्ग हैं
क्या कीजियेगा
ऐसा दृश्य तो आजकल आम है..

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

प्रेम में मर्यादा और अनुशाशन जैसे ख़त्म हो रहे हैं... मूल्यों का जिस तरह से अवमूल्यन हो रहा है... प्रेम के प्रतीक भी बदल रहे हैं और प्रतिमान भी.. आपकी कविता सच्ची से परिचय करा रही है.. सुन्दर कविता... प्रेम के बाजारीकरण के पर्व पर क्या शुभकामना और क्या बधाई.... सादर...

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

aisa jaruri bhi nahi..!! kuchh to aisa hota hai...jahan sirf do premi ke bich prem rahta hai...!!

waise satyata hai...aapki rachna me!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

प्रेम दिवस है चिल देखो,

हाट में बिकते दिल देखो,

ठेली वाला चांदी काट रहा,

चाट के बढ़ते बिल देखो !

आपको भी प्रेम दिवस मुबारक, वंदना जी !

KK Yadava ने कहा…

आज के दौर में प्रेम का सुन्दर चित्रण...बेहतरीन !!

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

ये प्रेम आज का मिल भी जावे तो क्या है...

सदा ने कहा…

बहुत सही कहा है आपने ...।

रजनीश तिवारी ने कहा…

पाश्चात्य संस्कृति का भारत पर असर ! प्रेम का दिन तो सिर्फ आज ही है तो फिर आने वाला कल किस लिए है ? व्यापार जगत में आज प्रेम का दिन है !! अच्छी रचना

Kunwar Kusumesh ने कहा…

valentine day की खूब कलई उतारी है आपने. क्या बात है.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीया वंदना जी


हाट में बिकते दिल देखो बहुत सामयिक रचना है -
महंगे गिफ्ट वाला ही
कन्या का सानिध्य पाता है

ये कन्याएं ऐसी क्यों होती हैं … ? :)

बधाई ! रचना में निहित व्यंग्य सत्य है ।

प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार !
प्रणय दिवस मंगलमय हो ! :)

बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

इमरान अंसारी ने कहा…

वाह वंदना जी,

व्यंग्य में लपेट कर आपने प्रेम का निम्नतम रूप दिखा दिया है........खुदा बचाए ऐसे प्रेम से.....बहुत सुन्दर पोस्ट|

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

gulab ki aai shamat dekho
........................
haat me bikte dil dekho.....
...................
bahut sateek abhivyakti...

रूप ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति. मेरी बधाई स्वीकारें.

संतोष कुमार ने कहा…

आज के दौर की और सोचने को मजबूर करती कविता !

आभार !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज के दिन पर अच्छा व्यंग है ....लोग प्रेम की गहराई नहीं समझते बस डे मना कर खुश हो लेते हैं ..

सटीक रचना

राजेश उत्‍साही ने कहा…

जरूर नकली रहे होंगे। असली दिल कभी बिकते नहीं। अलबत्‍ता टूट जरूर जाते हैं।

राज भाटिय़ा ने कहा…

वंदना जी बहुत सुंदर कविता कही ओर सही मोके पर, यह लोग सिर्फ़ परछाईयो के पीछे भाग रहे हे जो नही जानते की प्रेम क्या हे? धन्यवाद इस सुंदर कविता के लिये

संजय भास्कर ने कहा…

प्रेम दिवस को सभी को प्रण लेना चाहिए की प्रेम निस्वार्थ हो!

चैतन्य शर्मा ने कहा…

आज के दिन आपको मेरी प्यार भरी शुभकामनायें

वाणी गीत ने कहा…

इस दिन की पूरी कहानी बयां कर दी आपने ... शानदार व्यंग्य भी है , तो भटकते युवाओं को देख होता दर्द भी !

Atul Shrivastava ने कहा…

मौजूदा दौर की सच्‍चाई को उजागर करती रचना।

कुश्वंश ने कहा…

प्रेम की परिभाषा क्या है ?
प्रेम की अभिलाषा क्या है?
क्या समझेगी ये, तमाशाई दुनिया,
प्रेम की अपनी आशा क्या है?
सामयिक बात के लिए बधाई

ANIL RATHI BHILAI ने कहा…

Aapki RACHNAO SE MAI BAHUT EXAIT HUVA HU

vinod ने कहा…

behad khubsurat rachna...

mukes agrawal ने कहा…

nice one!

mukes agrawal ने कहा…

nice one!

mukes agrawal ने कहा…

गुलाब की आई शामत देखो