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मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

कैसे मन मे बसंत हो?

एक रात की नीरवता
एक मन की व्यथा
एक ओस की बूँद
जीवन क्षण भंगुर
फिर कैसे नव निर्माण
संभव हो
कैसे  कोई स्पंदन हो
कैसे मन में  बसंत हो

एक ख्वाब का आलिंगन
एक अंधेरे का सूनापन
एक दर्द की पराकाष्ठा
खुद ही अपना तर्पण
फिर कैसे ज्योति
प्रज्वलित हो
कैसे अन्तस रौशन हो
कैसे मन मे बसंत हो


अव्यक्त से व्यक्त
होने की आतुरता
साकार को पाने की
तुच्छ लालसा
क्लिष्ट मन की
भीषण आकुलता
और राह अगम्य
फिर कैसे दिव्य दर्शन हो
कैसे आत्मावलोकन हो
कैसे मन मे बसंत हो

39 टिप्‍पणियां:

Akshita (Pakhi) ने कहा…

कित्ती सुन्दर कविता....वसंत पंचमी तो बहुत प्यारा त्यौहार है..इसके साथ मौसम भी कित्ता सुहाना हो जाता है. वसंत पंचमी पर ढेर सारी बधाई !!

_______________________
'पाखी की दुनिया' में भी तो वसंत आया..

अजय कुमार झा ने कहा…

अक्सर पढता हूं जब उनको तो ,
एक पसोपेश में पड जाता हूं ,ल
ये उनके शब्दों का दर्द है या कि ,
किसी के मन की व्यथा को पिरोया है ...

वसंत आने की बधाई

यशवन्त माथुर ने कहा…

बसंत पंचमी की शुभ कामनाएं.

सादर

रश्मि प्रभा... ने कहा…

एक ख्वाब का आलिंगन
एक अंधेरे का सूनापन
एक दर्द की पराकाष्ठा
खुद ही अपना तर्पण
फिर कैसे ज्योति
प्रज्वलित हो
कैसे अन्तस रौशन हो
कैसे मन मे बसंत हो
virah ka sajiv varnan

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अप्रतिम रचना...बधाई
नीरज

रजनीश तिवारी ने कहा…

कैसे कोई स्पंदन हो
कैसे अन्तस रौशन हो
कैसे मन मे बसंत हो
बहुत गहरे भाव , बहुत अच्छी रचना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

भीषण आकुलता
और राह अगम्य
फिर कैसे दिव्य दर्शन हो
कैसे आत्मावलोकन हो
कैसे मन मे बसंत हो
--
सुन्दर रचना!
बसन्त सामने हो तो आकुलता तो होगी ही!

सदा ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर भावों का बखूबी चित्रण किया है आपने इस अभिव्‍यक्ति में ..।

ZEAL ने कहा…

वंदना जी , बहुत पसंद आई ये रचना ...कैसे मन में वसंत हो ..

वाणी गीत ने कहा…

कैसे आत्मावलोकन हो , कैसे मन में वसंत हो...
वेदना को शब्दों ने खूब समझाया ...

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

अव्यक्त से व्यक्त
होने की आतुरता
साकार को पाने की
तुच्छ लालसा
क्लिष्ट मन की
भीषण आकुलता
और राह अगम्य
फिर कैसे दिव्य दर्शन हो
कैसे आत्मावलोकन हो
कैसे मन मे बसंत हो

वसंत पंचमी की शुभकामनाएं,वंदना जी !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मन बसंत तो लाना होगा। बहुत सुन्दर कविता।

संतोष कुमार ने कहा…

सुन्दर कविता...बहुत अच्छी रचना !
बसंत पंचमी की शुभकामनाएं !!

Kailash C Sharma ने कहा…

एक ख्वाब का आलिंगन
एक अंधेरे का सूनापन
एक दर्द की पराकाष्ठा
खुद ही अपना तर्पण
फिर कैसे ज्योति
प्रज्वलित हो
कैसे अन्तस रौशन हो
कैसे मन मे बसंत हो
...

बहुत मर्मस्पर्शी रचना..सच है कैसे मन में वसंत हो...वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें.

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी,

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति|

राजेश उत्‍साही ने कहा…

हो रात की नीरवता
रहे मन की व्यथा
सच, ओस की बूँद
जीवन क्षण भंगुर
फिर भी नव निर्माण
संभव है, स्पंदन है
मन में ही तो वसंत है

करें ख्वाब का आलिंगन
दूर अंधेरे का सूनापन
सहें दर्द की पराकाष्ठा
खुद को कर अर्पण
ज्योति प्रज्वलित कर
कर अन्तस रौशन
मन में ही तो वसंत है

अव्यक्त से व्यक्त
होने की आतुरता
साकार को पाने की
जीवट लालसा
क्लिष्ट मन की
भीषण आकुलता
तभी राह गम्य है
दिव्य दर्शन है
आत्मावलोकन है
मन में ही तो वसंत है

Dorothy ने कहा…

गहन अर्थों को समेटती एक खूबसूरत और भाव प्रवण रचना. आभार.
आपको वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!
सादर,
डोरोथी.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बसंत पर सुन्दर प्रस्तुति...बधाई

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

बरसे यूँ ही अभिव्यक्ति-सुधा,हों भाव प्रबल,गहरे,अन्नत,
जब जब पाठक रस पान करे, पतझर भी हो जाए बसंत !

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं !

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

वसंत पर इतनी मार्मिक और दिल को छू लेने वाली कविता पहले नहीं पढ़ी.. नए भाव की कविता है यह... दर्द, बेबसी.. प्रेम विरह.. आशा निराशा के हिंडोले में झूलती कविता मन को छू गई.. सुन्दर !

Udan Tashtari ने कहा…

आपको एवं आपके परिवार को बसंत पंचमी पर हार्दिक शुभकामनाएं.

सादर

समीर लाल
http://udantashtari.blogspot.com/

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

अद्भुत रचना !
बहुत ही खूबसूरती से विरह को कलमबद्ध किया हैँ ।
बहुत बहुत आभार वन्दना जी ।

अमिताभ मीत ने कहा…

सुन्दर ! बहुत ही सुन्दर !!

बहुत अच्छी लगी आप की ये रचना ...

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

श्री अजय कुमारजी झा से पुरी तरह सम्मत.
बसंतपंचमी की शुभकामनाओं सहित...

Suman ने कहा…

bahut sunder rachna hai ....

मनोज कुमार ने कहा…

इस कविता में नागर जीवन की जटिलता, आपाधापी, संग्राम और इन सबसे अलग उम्‍मीद और आंकाक्षाओं की अपरंपार दुनिया है ।

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर भावों का बखूबी चित्रण बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं !

राज भाटिय़ा ने कहा…

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर संवेदनशील भाव समेटे हैं वंदना जी ...........बसंतोत्सव की शुभकामनायें

Asha ने कहा…

मन को छूती कविता | बधाई
आशा

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

basanti mausam ki basanti rachna!

ana ने कहा…

kamaal ka likha hai aapne

चैतन्य शर्मा ने कहा…

माँ सरस्वती को नमन........बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें आपको भी......

Rakesh Kumar ने कहा…

'Sakaar ko pane ki tuchch lalsa'
nahi nahi Vandanaji sakar ko pane ki lalsa to atiuttam lalsa hai.
Aap ka bhav jagat anupam hai,abhivayakti dil ko chooti hai

Minakshi Pant ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति !

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'कैसे मन में बसंत हो '
जीवन की कशमकश और विसंगतियों को चित्रित करती बहुत ही प्रभावशाली भावपूर्ण रचना...
आभार !

संजय भास्कर ने कहा…

बसंत पर सुन्दर प्रस्तुति
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

ise bhi bhejo collection ke liye , bahutbahut bahut hi pyaari kavita , tumhe pata hai , jab tum bahut saare shabdo ka use nahi karti ho to kavita sundar ban jaati hai .. this is your speciality... ab gurugyaan ke liye kuch rupaye bhej do .

anyway , one of your best love poems.. i will say that it is a collage of words, expressions , and mental images.

very good
thanks
vijay

Rajesh Kumari ने कहा…

kaise man me basant ho ...achchi prastuti.