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शुक्रवार, 10 जून 2011

आखिर कतरनें भी कभी सीं जाती हैं

इंतज़ार के पलों को
सींते सींते
बरसों बीते
मगर इंतज़ार है
कि बार बार
उधड जाता है
सीवन पूरी ही नही होती
 

कभी धागा कम पड़ जाता है
तो कभी सुईं खो जाती है
और अब तो
वो नाता भी नहीं बचा
जिसे सीने के लिए
उम्र तमाम की थी
आखिर कतरनें  भी
कभी सीं जाती हैं

40 टिप्‍पणियां:

रचना ने कहा…

excellent poem vandana
laa jawaab kar diyaa aapne

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

कमाल की लेखनी आपकी वन्दना जी,
कितनी गेहरी बात कही है आपने, बहुत ही सुन्दर रचना लिखी है!

निर्मला कपिला ने कहा…

आज तक की सभी कवितायों से बढिया रचना। बहुत बहुत बधाई।

अजय कुमार ने कहा…

naa khatm hone waala intajaar---

नीरज गोस्वामी ने कहा…

वाह क्या बात कही है...कतरने भी कभी सी जाती हैं...लाजवाब
नीरज

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वंदना जी का सन्देश --

आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
http://tetalaa.blogspot.com/

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

यह कविता रिश्तो को समझने में मदद कर रही है... भावों का सुन्दर समन्वय है... बहुत सुन्दर

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति ... इंतज़ार को नया बिम्ब मिला ..

Manpreet Kaur ने कहा…

वह वह बहुत ही अच्छे शब्द है !मेरे ब्लॉग पर जुरूर आए !
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Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बहुत गहरी बात कह दी है आपने ..

इमरान अंसारी ने कहा…

वाह.....लगता है ये कविता कुछ सीते-सीते ही रची गयी है......कतराने भी कभी सी जाती हैं .....वाह....शानदार

rashmi ravija ने कहा…

आखिर कतरनें भी
कभी सीं जाती हैं

क्या बात कही है..

prerna argal ने कहा…

और अब तो
वो नाता भी नहीं बचा
जिसे सीने के लिए
उम्र तमाम की थी
आखिर कतरनें भी
कभी सीं जाती हैं
bahut gahari baat bahut hi anokhe dhang se kahi aapne badhaai sweekaren itani khubsoorat rachanaa ke liye.

please visit my blog.thanks

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

bhut sundar..maza aa gaya padh kar

shikha varshney ने कहा…

आखिर कतरनें भी
कभी सीं जाती हैं
उफ़ उफ़ उफ़ क्या बात कह दी.

anupama's sukrity ! ने कहा…

बहुत गहरी ..मन की व्यथा ...!!
एक प्रश्न चिन्ह दे गयी ...
बहुत सुंदर रचना ...!!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ी ही गहरी बातें।

मनोज कुमार ने कहा…

तार तार हो रहे रिश्तों की काव्यात्मक अभिव्यक्ति अच्छी लगी।

Kailash C Sharma ने कहा…

गहन सोच को रेखांकित करती बहुत सशक्त प्रस्तुति..आपकी लेखनी का ज़वाब नहीं..आभार

Maheshwari kaneri ने कहा…

मन को छू गई… बहुत सुन्दर……. धन्यवाद

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
--
मगर कतरनों को ही सिया जाता है!
साबुत कपड़े को कोई नहीं सिलता है!
--
हमारी तो उम्र ही गुजर गई
कतरनों को सिलते-सिलते!

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (11.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

सदा ने कहा…

भावमय करते शब्‍दों के साथ्‍ा बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

ZEAL ने कहा…

कतरनों को जोड़ने और सीने में ही ये उम्र तमाम हो जाती हैं।

संजय भास्कर ने कहा…

इंतज़ार के पलों को
सींते सींते
बरसों बीते
मगर इंतज़ार है
कि बार बार
उधड जाता है
सीवन पूरी ही नही होती
........वाह क्या बात कही है

संजय भास्कर ने कहा…

कुछ व्यक्तिगत कारणों से पिछले 15 दिनों से ब्लॉग से दूर था
इसी कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका !

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut khoob Vandna ji -hamesha ki tarah .aabhar

संगीता पुरी ने कहा…

कितना चिंतन करती हैं आप ??

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके ब्लॉग की किसी पोस्ट की कल होगी हलचल...

नयी-पुरानी हलचल

धन्यवाद!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

आखिर कतरनें भी
कभी सीं जाती हैं... kitne sare bhaw ismein bah nikle

sushma 'आहुति' ने कहा…

bhut hi gahri aur succhi baat kahi...

Udan Tashtari ने कहा…

सुपर...बेहतरीन रचना.

Vivek Jain ने कहा…

आखिर कतरनें भी
कभी सीं जाती हैं


लाजवाब,साभार- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Sunil Kumar ने कहा…

इंतजार इंतजार और इंतजार .................सुंदर अतिसुन्दर

श्यामल सुमन ने कहा…

कम शब्द अधिक बात
वन्दना की खास बात

लेकिन - सीं, सींते सींते, सुईं -? - या - सी, सीते सीते, सुई - हो सके तो बिना अन्यथा लेते हुए एक बार देख लें

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

udaya veer singh ने कहा…

क्यों सी दिया ,अगर अ -सिया रहे ,तभी सिने की कवायद होगी / अहसास रहेगा प्रतीक्षित का ,कभी वो भी कर बैठे ... गुस्ताखी माफ़ .
रचना के स्वरुप में बह गया ,अति सुंदर संवेदन - साक्ष्य शुक्रिया जी /

mahendra verma ने कहा…

संबंधों की कतरनों को सीना....
वाह,बहुत गहरी बात...
बड़ी सुदरता से अभिव्यक्त हुई है।

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

वाह बही सुन्दर ..वाह क्या बात कही ...

यादें ने कहा…

इन्तजार में जिन्दगी ,खत्म हो जाती है ,
पर इन्तजार कभी खत्म नही होता ...
एक खूबसूरत रचना सरल शब्दों में गहराई लिये हुए

शुभकामनाएँ |

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'आखिर कतरने भी
कभी सी जाती हैं '
,,,,,,,,,,,,जिंदगी की अंतरिम कशमकश को शब्द देती सुन्दर रचना