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रविवार, 26 जून 2011

क्या ऐसा होगा

ये सुबह ठहरती क्यों नही……
कब तक आस के मोती सम्हालूँ
जानते हो ना
तुम्हारी आस ही
ज़िन्दा रखे है
और तुम मेरी ज़िन्दगी की सुबह
जब तुम वापस आओगे
जानते हो ना
उसी दिन सुबह ठहरेगी मेरे आँगन में
कभी ना जाने के लिए ......तुम्हारी तरह
क्या ऐसा होगा ..........
मेरी आस का सूरज उगेगा........

और आसमां धरती पर उतरेगा
बताओ ना ...........
क्या ऐसा होगा
जब कुमुदिनी दिन में खिलेगी

40 टिप्‍पणियां:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

सुंदर कल्‍पना।

---------
विलुप्‍त हो जाएगा इंसान?
ब्‍लॉग-मैन हैं पाबला जी...

mahendra verma ने कहा…

क्या ऐसा होगा
जब दिन में कुमुदनी खिलेगी

नए प्रतीकों से सजी, कोमल भावनाओं को व्यक्त करती सुंदर कविता।

prerna argal ने कहा…

मेरी आस का सूरज उगेगा........
और आसमां धरती पर उतरेगा बताओ ना ...........
क्या ऐसा होगा
जब कुमुदिनी दिन में खिलेगी bahut sunder bhav liye sunder rachanaa.badhaai sweekaren.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

असंभव को संभव बनाने कि चाह ...सुन्दर बिम्ब से सजी कोमल सी रचना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना!
आशा और विश्वास की दहलीज पर बहुत कुछ लिख दिया है आपने।
कुमुदिनी दिन में नहीं रात में जरूर खिलेगी!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वो सुबह कभी तो आएगी ... बहुत खूबसूरत एहसास ...

रविकर ने कहा…

जरुर खिलेगी ||

Dr Varsha Singh ने कहा…

बेहद उत्कृष्ट रचना है यह.
आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें

मीनाक्षी ने कहा…

आस के मोती...आस का सूरज... मन के अलग अलग भावों की अभिव्यक्ति प्रभावित करती है..

रश्मि प्रभा... ने कहा…

hoga... zarur hoga

रजनीश तिवारी ने कहा…

ummeed pe duniya kaayam hai.
....Bahut hi sundar rachna ..komal bhav liye hue.

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut sundar bhav .....adheerta ko shabdon ka chola pahna diya hai aapne .aabhar

कुश्वंश ने कहा…

आशाएं जीवन में रंग भरती है, बहु आयामी जीवन को नयी रफ़्तार देती है, सकारात्मक उर्जा का संसार उजाले की कामना करता है और उजाला दूर नहीं होता , सुबह ठहरेगी जरूर . बेहद भावभीनी कविता बधाई

कुश्वंश ने कहा…

आशाएं जीवन में रंग भरती है, बहु आयामी जीवन को नयी रफ़्तार देती है, सकारात्मक उर्जा का संसार उजाले की कामना करता है और उजाला दूर नहीं होता , सुबह ठहरेगी जरूर . बेहद भावभीनी कविता बधाई

Udan Tashtari ने कहा…

जरुर जी...बहुत बेहतर रचना...

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

khoobsurat kavita... sajeev kalpna... naye vimb...

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι ने कहा…

क्या ऐसा होगा जब कुमुदनी दिन में खिलेगी।
बेहतरीन।

Maheshwari kaneri ने कहा…

क्या येसा होगा ?..हाँ येसा हि होगा जरूर खिलेगी! ..वंदना जी..सुन्दर रचना ....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आस है, विश्वास है।

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

वो सुबह कभी तो आएगी...

sushma 'आहुति' ने कहा…

bhut hi sunder prastuti....

akhtar khan akela ने कहा…

inshaa allah aapki aas zrur or jldi puri hogi bhtrin andaz me prstuti bdhai ho ..akhtr khan akela kota rajsthan

Dr.J.P.Tiwari ने कहा…

क्या ऐसा होगा
जब कुमुदिनी दिन में खिलेगी
Why not, sure and certain.

sanjay ने कहा…

बहुत अच्छी कविता है

आशुतोष की कलम ने कहा…

विश्वास पर दुनिया टिकी है...

सतीश सक्सेना ने कहा…

आशा रखें ... ! शुभकामनायें आपको !

सदा ने कहा…

क्या ऐसा होगा
जब दिन में कुमुदनी खिलेगी

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' ने कहा…

बहुत सुन्दर

इमरान अंसारी ने कहा…

बढ़िया पोस्ट|

Kailash C Sharma ने कहा…

कोमल अहसासों की बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..आभार

तदात्मानं सृजाम्यहम् ने कहा…

लंबे समय के बाद तारीफ के साथ...बाअदब नमस्कार

नीरज गोस्वामी ने कहा…

ग़म की अँधेरी रात में...दिल को न बेकरार कर...सुबह जरूर आएगी, सुबह का इंतज़ार कर....

बेहतरीन रचना...बधाई स्वीकारें

नीरज

राजेश उत्‍साही ने कहा…

इंतजार का फल मीठा होता है।

Anupam ने कहा…

अनुपम अभिव्यक्ति..

अविनाश मिश्र ने कहा…

मेरी आस का सूरज उगेगा........
और आसमां धरती पर उतरेगा बताओ ना ...........
क्या ऐसा होगा
जब कुमुदिनी दिन में खिलेगी....
dil me utarti panktiyan....
bahut sundar bhav......dhanywad
avinash001.blogspot.com

Ravi Rajbhar ने कहा…

Bahut hi bhawpoorn prashtuti di hai vandna ji...!

badhai swikare..!

ममता त्रिपाठी ने कहा…

यदि दृढ़ विश्वास हो तो कुमुदिनी दिन में खिल सकती है। असम्भव सम्भव में बदल सकत है।



क्या ऐसा होगा
जब कुमुदिनी दिन में खिलेगी


पंक्तियाँ बहुत सुन्दर हैं।

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' ने कहा…

यहाँ हर बात हो सकती अग़र तद्बीर की जाए,
वगरना बस फ़क़त तक्दीर पर रोना ही होता है।

Rakesh Kumar ने कहा…

चाहत सच्ची है तो 'ऐसा भी होगा'

जब कुमुदिनी दिन में खिलेगी

जाग्रत में नहीं तो स्वप्न में अवश्य.

Richa ने कहा…

मेरी आस का सूरज उगेगा......??