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बुधवार, 6 जुलाई 2011

घर साउंड प्रूफ बनवा लिया है

इक युग बीता
आवाजें देते देते
मगर लगता है
तुम तक पहुँचती
ही नहीं
कभी देखना
घर से बाहर
निकलकर
हर खिड़की.
हर दरवाज़े
की कुण्डियों पर
मेरी सदायें
लटकी मिलेंगी
इस आस पर
कभी तो तुम
उन कुण्डियों
को खोलोगे
मगर शायद
तुमने बाहर
आना ही छोड़
दिया है तभी
डाक कभी लौटकर
आई ही नहीं और
सदायें चौखट पर ही
दम तोड़ जाती हैं
लगता है तुमने
घर साउंड प्रूफ
बनवा लिया है

28 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वाह ...क्या ख़याल है ...क्या अभिव्यक्ति है ..सदाएँ लटकी मिलेंगी ... बहुत खूब ...

सदा ने कहा…

वाह खूबसूरत शब्‍दों के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

योगेन्द्र पाल ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

नए ख्याल की कविता.. बढ़िया विम्ब...

रश्मि प्रभा... ने कहा…

लगता है तुमने
घर साउंड प्रूफ
बनवा लिया है ... per dekhna ek din meri awaaz khamosh si pahunchegi

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आपकी कल्पना शक्ति का जवाब नहीं ... ख्यालों की उड़ान कहाँ तक जाती है ... बहुत लाजवाब ...

shikha varshney ने कहा…

वाह गज़ब की सोच.क्या बात कही है.अटकी सदाए, साउंड प्रूफ घर.बहुत खूब.

रविकर ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति ||

rashmi ravija ने कहा…

बहुत ही बढ़िया अभिव्यक्ति

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut khoob vandna ji .aabhar

नीरज गोस्वामी ने कहा…

हमेशा की तरह...बेजोड़ रचना...बधाई स्वीकारें

नीरज

Arunesh c dave ने कहा…

bahut hi sundar भावपूर्ण अपने नेताओ तक भी नही पहुंच रही और सत्ता सुंदरी तक भी नही

Pallavi ने कहा…

behad khubsurat rachnaa mam....khubsurat shabdon ke saath behtareen abhi vyakti...best wishes..

रजनीश तिवारी ने कहा…

दीवारों से टकराकर सदाएँ दम तोड़ देती हैं ...वाह !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आवाज बाहर आना भी कठिन है तब तो।

Rachana ने कहा…

sunder soch bhavnaon ki bahut hi achchhi abhivyakti .sadayen latki milengi ............kya baat hai
rachana

devendra gautam ने कहा…

संवेदनाओं को जखझोरती नज़्म

अभिषेक मिश्र ने कहा…

अद्भुत, क्या बात है !

Dr Varsha Singh ने कहा…

सदायें चौखट पर ही
दम तोड़ जाती हैं
लगता है तुमने
घर साउंड प्रूफ
बनवा लिया है

लाजवाब ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut khoob vandna ji achche bhaav achche shabdon se susajjit kavita.maayoos hokar lot ti hui sadaaon ko ho sakta hai koi peeche se aavaj de.

shilpa mehta ने कहा…

साउंड प्रूफ घर हो तो ठीक है - आशा होती है कि सुनने वाला बाहर आये कभी | पर कान ही बंद ना हों | संवेदनाएं जीवित होनी चाहिए - बंद दरवाजे कभी ना कभी खुल ह जाते हैं ... |

इमरान अंसारी ने कहा…

कुछ अलग सी लगी ये पोस्ट.........आप क्या-क्या सोच लेती हैं.......घर साउंड प्रूफ....वाह.......बहुत सुन्दर|

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

sound proofing achhi hai!!

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

ख्यालों में जाने क्या क्या जी जाते हम, और वो सभी एहसास सच से लगते हैं. बहुत अच्छी रचना, बधाई वंदना जी.

कविता रावत ने कहा…

बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति!

veerubhai ने कहा…

अकाउस- टिक्स की बात करती है आपकी रचना -लगता है घर साउंड प्रूफ बनवा लिया है .अभिव्यक्ति की उड़ान ऊंची है .अफवाह के पंछी से भी बहुत ऊंची .

Atul Shrivastava ने कहा…

मौजूदा दौर की सुंदर प्रस्‍तुति।
शुभकामनाएं आपको।