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शनिवार, 8 मार्च 2014

महिला दिवस के उपलक्ष्य में


सिर्फ एक दिन नही समस्त सृष्टि ही मेरी है 
या कहो मैं हूँ तभी सृष्टि का विस्तार है 
फिर कैसे ना कहूँ 
एक दिन में नही बँधने वाली 
मै हूँ हर दिन जीवन में मनने वाली दीवाली  
अब ये तुम्हें समझना जरूरी है 
जब हर दिन मेरा है 



सुबह से आज जैसे आम महिलायें करती हैं वैसे ही शापिंग के लिये गयी और साडियाँ खरीदीं भी और खरीदवायी भी ………लीजिये मन गया महिला दिवस आज कुछ इस तरह :) और फ़ुर्सत ही नही मिली कि यहाँ आयें मगर अब आये हैं तो आपको बता दें कि महिला दिवस के उपलक्ष्य में कल यानि 9 -3-2014 को रात 8 बजकर 5 मिनट पर आप आकाशवाणी के 246.9 m / 1215 kilo hertz पर महिला काव्य गोष्ठी का आस्वादन कर सकते हैं और चर्चा का भी आनन्द ले सकते हैं और यदि कोई सुने और रिकार्ड कर सके तो कर ले क्योंकि हम तो सुन नही पायेंगे ……कुछ चित्र साझा कर रही हूँ जिसमें रेणु हुसैन, रेणु पंत , इंदु सिंह , पुष्पा राही और आपकी ये दोस्त शामिल है 




2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

मित्रों।
तीन दिनों तक देहरादून प्रवास पर रहा। आज फिर से अपने काम पर लौट आया हूँ।
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आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (09-03-2014) को आप रहे नित छेड़, छोड़ता भाई मोटा ; चर्चा मंच 1546 पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Vaanbhatt ने कहा…

हर दिन दीवाली हो तभी खुशियां स्थायी होतीं हैं...वर्ना बस औपचारिकता बन के रह जाती है...