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रविवार, 18 जून 2017

ब्रह्म वाक्य


दुःख दर्द आंसू आहें पुकार
सब गए बेकार
न खुदी बुलंद हुई
न खुदा ही मिला
ज़िन्दगी को न कोई सिला मिला 


यहाँ
रब एक सम्मोहन है
और ज़िन्दगी एक पिंजर
और तू
महज साँस लेती
भावनाओं से जकड़ी एक बदबूदार लाश 


ये जानते हुए
कि यहाँ कोई नहीं तेरा
चल फकीरा उठा अपना डेरा
और गुनगुनाता रह ज़िन्दगी के हर मोड़ पर
ये ब्रह्म वाक्य 


यहाँ मैं अजनबी हूँ ...मैं जो हूँ बस वही हूँ

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