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शुक्रवार, 13 जून 2008

खामोश निगाहों की जुबान हैं आंसू,
दिल पर किसी ज़ख्म का निशाँ हैं आंसू,
यूं टू हसरतों के जज्ब होने का नाम हैं आंसू,
फिर भी आँख से न dhalakne का नाम हैं आंसू।



उदास आंखों से आंसू नही गिरते हैं,
यह टू मोतियों की तरह सीपियों में पलते हैं।



दर्द में मैंने जिसको भी करीब पाया था
आंसू बहता वो मेरा ही साया था



काँटों भरी राह का बाम है ज़िंदगी,
दर्द में सिमटी हर शाम का नाम है ज़िंदगी,
नफरतों के जहाँ में हंसने का नाम है ज़िंदगी,
दिन के उजालों में जलने का नम है ज़िंदगी,
रात के वीरानों में भटकने का नाम है ज़िंदगी,
असल में फूलों से बचकर चलने का नाम है ज़िंदगी।


बहारों का आँचल नही है हर किसी के लिए
पतझड़ का दमन नही है हर किसी के लिए
बहारों में फूल खिलते हैं,दिल भी मिलते हैं
फिर कभी न मिलने के लिए,पतझड़ में दिल बिचादते एन।


ऐ अश्कों जज्ब हो जाओ आखों की कोरों में
तुम्हें नही दी इजाज़त बाहर निकलने की ज़माने ने।


ज़ख्म कागज़ पर लिखकर , दर्द दिल का मिटा लेते हैं
अपनी तकदीर से रु-बी-रु होकर ख़ुद को जीने की सज़ा देते एन।


डूब गया हूँ ग़मों में कुछ इस कदर
की दरिया-ऐ-जिंदगानी अब पार नही होती
मैं टू वो माझी हूँ जिसे तलाश है एक कश्ती की
और यह तलाश है की ख़त्म नही होती।

दिल के टूटने की चटख बहुत दूर तक गई
मगर आवाज़ सुनने वाला रह में कोई न था


दिल की आवाज़ सुन रही थी में
खामोश वातावरण में जी रही थी में
न जाने यह कैसा तूफ़ान आ गया
भा में ज़िंदगी की कश्ती फंस गई है
न डूब रही है और न निकल रही है
साहिल भी साथ है मगर किनारे की तलाश है



आज ज़िंदगी बन गई है ऐसा पिंजरा
जिसमें बंद पंछी पंख फद्फादा भी नही सकता

जीने की इच्छा हो चुकी है ख़त्म
सिर्फ़ जीने की रस्म निभाए जा रही हूँ मैं
हँसी का रंग भी बदल चुका है अब
सिर्फ़ खोखले अंदाज़ मैं हँसे जा रही हूँ में
दिल से टू टूट चुकी थी बहुत पहले ही
अब टू और टूटने के लिए जिए जा रही हूँ में

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