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मंगलवार, 23 दिसंबर 2008

क्यूँ

क्यूँ हर बार नारी को ही अग्निपरीक्षा देनी पड़ी
क्यूँ हर बार नारी के सर ही हर दोष मढा गया
क्यूँ हर बार उसके हर निर्णय का अपमान किया गया
क्यूँ हर बार पुरूष के दंभ का शिकार बनी
हर अच्छाई का श्रेय नर को ही क्यूँ
क्यूँ हर बुराई का ठीकरा हर बार
नारी के ही सर फोड़ा गया
क्या उसका कोई अस्तित्व नही
क्या वो कोई इन्सान नही
क्या फर्क है नारी और नर में
क्या नारी का यूँ तिरस्कार कर
पुरूष सफलता पायेगा
क्या इतने से ही उसका
पोरुष संबल पा जाएगा
जब शक्ति बिना शक्तिमान
कार्य नही कर पाता है
तो फिर बता ए नर
तू उससे तो बड़ा नही
क्यूँ समझ नही पता है
नारी बिना नर का भी अस्तित्व नही

3 टिप्‍पणियां:

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

aapne bahut sudar vyakhya ki hai ,naari man ki.. bahut hi prabhavshaali.

नारी बिना नर का भी अस्तित्व नही

bahut sundar likha hai .


badhai

vijay

अनुपम अग्रवाल ने कहा…

vichaarneeya prashn.
achhee abhivyakti.

Renu Sharma ने कहा…

vandana ji , naari kuchh bhi koshish karle purush use kabhi bhi samman ki drishti se nahi dekh sakta .
jo kahta hai ki vah aisa karta hai to jhoont bolta hai .