पेज

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लॉग से कोई भी पोस्ट कहीं न लगाई जाये और न ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

स्त्रियों का नया स्वांग

 खुद को समेटकर रखती है अपने अन्दर ही बाहर नहीं मिलता कोई कोना या ठिकाना सुस्ताने को बिछे नहीं मिलते हरसिंगार खोखले सन्दर्भों से परिभाषित नहीं किए जा सकते सम्बन्ध

आग्नेय नेत्रों और बोलियों से
हिल जाती हैं पुख्ता नींवें भी एक दिन
रबड़ को एक हद तक खींचना ही शोभा देता है
तात्पर्य यह
कि स्त्रियों ने सीख लिया है
तुम्हारी परिक्रमा से बाहर एक वृत्त बनाना
जो उनसे शुरू होकर उन पर ही ख़त्म होता है
यह स्त्रियों का नया स्वांग
तुम्हारे अहम पर आखिरी चोट है
गुठने चलने के नियमों को ताक पर रख कर ली है उसने अपनी रीढ़ सीधी
आओ, कर सको तो करो
स्त्रियों की नयी दुनिया को सलाम
'आमीन' कहने भर से हो जायेगी हर मुश्किल आसान