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शुक्रवार, 1 अगस्त 2008

गर किसी को मीले मेरा पता

मन की घुटन अश्कों में बह नही पाती
शब्दों में बयां हो नही पाती
अजीब मुकाम पर है जिंदगी
जो रुक् पाती हैमन की घुटन अश्कों में बह नही पाती
शब्दों में बयां हो नही पाती
अजीब मुकाम पर है जिंदगी
जो रुक् पाती है
और
आगे चल पाती है
यादों के बवंडर में घीर गई है जिंदगी
ख़ुद को ढूंढ रही हूँ
जाने कहाँ खो गई हूँ
जीसमें ख़ुद को खो दीया
उसे तो पता भी चला
मैं उसके लिए कुछ नही
मगर वो मेरे लिए सब कुछ है
मेरा din,मेरी रात
मेरी खुशी ,मेरा गम
मेरा हँसना मेरा रोना,
मेरा प्यार मेरी लडाई
मेरा दोस्त,मेरा परिवार,
मेरा आज, मेरा कल,
मेरा आदी , मेरा अंत,
उसके बीना अस्तीत्व ही नही मेरा
उसके बीना जिंदगी की कल्पना ही नही
अब ऐसे में कहाँ खोजूं अपने आप को
जहाँ खुदी को मिटा दीया मैंने
उसमें ख़ुद को समां दीया मैंने
वहां कैसे अलग करुँ ख़ुद को
मुझे मेरा 'मैं' कहीं मीलता नही
अपने आप से पल पल लड़ रही हूँ मैं
अपना पता पूछ रही हूँ मैं
गर किसी को मीले तो बता देना
मुझे मुझसे मिला देना
और
आगे चल पाती है
यादों के बवंडर में घीर गई है जिंदगी
ख़ुद को ढूंढ रही हूँ
जाने कहाँ खो गई हूँ
जीसमें ख़ुद को खो दीया
उसे तो पता भी चला
मैं उसके लिए कुछ नही
मगर वो मेरे लिए सब कुछ है
मेरा din,मेरी रात
मेरी खुशी ,मेरा गम
मेरा हँसना मेरा रोना,
मेरा प्यार मेरी लडाई
मेरा दोस्त,मेरा परिवार,
मेरा आज, मेरा कल,
मेरा आदी , मेरा अंत,
उसके बीना अस्तीत्व ही नही मेरा
उसके बीना जिंदगी की कल्पना ही नही
अब ऐसे में कहाँ खोजूं अपने आप को
जहाँ खुदी को मिटा दीया मैंने
उसमें ख़ुद को समां दीया मैंने
वहां कैसे अलग करुँ ख़ुद को
मुझे मेरा 'मैं' कहीं मीलता नही
अपने आप से पल पल लड़ रही हूँ मैं
अपना पता पूछ रही हूँ मैं
गर किसी को मीले तो बता देना
मुझे मुझसे मिला देना

13 टिप्‍पणियां:

222222222222 ने कहा…

आप स्वयं अपना पता हैं।

Sumit Pratap Singh ने कहा…

सादर ब्लॉगस्ते,
कृपया पधारें व 'एक पत्र फिज़ा चाची के नाम'पर अपनी टिप्पणी के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करें।

आपकी प्रतीक्षा में...

Yogesh Verma Swapn ने कहा…

sunder rachna hai.

साळसूद पाचोळा ने कहा…

गर किसी को मीले मेरा पता... to bata denaa... sahi hai...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

मैं को चला खोजने जो भी,
खाली झोली लेकर लौटा।
दुख के बादल छँट जायेंगे,
कर दो जल्दी दूर मुखौटा।

खट्टी-मीठी यादों को,
विस्मृत करना ही होगा।
वर्तमान को प्रेम-प्रीत की,
खुशियों से भरना होगा।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

मैं को चला खोजने जो भी,
खाली झोली लेकर लौटा।
दुख के बादल छँट जायेंगे,
कर दो जल्दी दूर मुखौटा।

खट्टी-मीठी यादों को,
विस्मृत करना ही होगा।
वर्तमान को प्रेम-प्रीत की,
खुशियों से भरना होगा।

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

हिन्दी भाषा के विकास में अपना योगदान दें।
रचनात्मक ब्लाग शब्दकार को रचना प्रेषित कर सहयोग करें।
रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

Prem Farukhabadi ने कहा…

Vandana ji,

उसके बीना अस्तीत्व ही नही मेरा
उसके बीना जिंदगी की कल्पना ही नही
अब ऐसे में कहाँ खोजूं अपने आप को
sach kaha .bahut sundar.

सुशील छौक्कर ने कहा…

मुझे मेरा 'मैं' कहीं मीलता नही
अपने आप से पल पल लड़ रही हूँ मैं
अपना पता पूछ रही हूँ मैं
गर किसी को मीले तो बता देना
मुझे मुझसे मिला देना

बेहतरीन लिखा है।
एक बात आपके ब्लोग के कमेट मेरे को मेल क्यों हो रहे है समझ नही आ रहा।

vijay kumar sappatti ने कहा…

vandana ji

bahut hi umda rachna hai , ek do jagah , english me type hai , use sudhare ..

thoghts ko acha shabdik expression mila hai ..

bahut badhai .

take care
regards
vijay

Preeti tailor ने कहा…

ek sundar bhavna vyakt ki hai

shyam gupta ने कहा…

वह आत्म रूप परमात्व तत्व,
मेरे चेतन में अन्तस में ।
में उस में लय,वह मुझमें है,
वह ही कण-कण के अन्तर में।

सब्को जब अपने में देखा,
अपने में सब को जान लिया।
मैं क्या हूं,यह जीवन क्या है,
कुछ-कुछ समझा कुछ जान लिया॥

generic cialis ने कहा…

Interesting article, added his blog to Favorites