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बुधवार, 5 सितंबर 2012

अज्ञात की श्रेणी मे हूँ ……क्या ढूँढ सकोगे मुझे?

अज्ञात की श्रेणी मे हूँ
क्या ढूँढ सकोगे मुझे?
मै कोई दरो-दीवार नही
कोई इश्तिहार नही
कोई कागज़ की नाव नहीं
ना अन्दर ना बाहर
कोई नही हूँ
कोई पता नहीं
कोई दफ़्तर नही
कोई सूचना नहीं
कोई रपट नहीं
ऐसा किरदार हूँ
क्या ढूँढ सकोगे मुझे?
पता , नि्शानी, ठिकाना
कुछ नही है
कोई चिन्ह नहीं
पह्चान पत्र नहीं
आदम और हव्वा का
मानचित्र नहीं
कोई परिंदा नही
कोई चरित्र नहीं
कोई दरवेश नही
कोई असाब नहीं
कुछ नही मिलेगी सूचना
कहीं नहीं मिलेगी
क्या तब भी ढूँढ सकोगे मुझे?
तू भी नही
मै भी नही
हम भी नही
कोई व्याकरण नही
कोई वर्ण नहीं
कोई उच्चारण नहीं
हाव भाव नही
शब्द प्रकार नहीं
कोई सम्पूर्ण या मिश्रित अंश नही
मेरा कोई अस्तित्व ही नहीं
मगर फिर भी हूँ ……कहीं ना कहीं
तभी तो अज्ञात हूँ
क्या कर सकोगे ज्ञात मुझे
क्या ढूँढ सकोगे मुझे ?
कौन हूँ मै?
एक छाया चित्र
ना ना ………कोई शक्ति नही
कोई भक्ति नही
कोई तीर्थ नही
कोई स्थल नही
फिर भी हूँ ……कहीं ना कहीं

अज्ञात की श्रेणी मे हूँ
क्या ढूँढ सकोगे मुझे?
नही ना ………
खोज खुद ही करनी होगी
बताती हूँ ………


जिसका स्वरूप नही होता
जिसकी पहचान नही होती
जिसका अस्तित्व प्रमाणिक नही होता
मगर फिर भी होता है ……कहीं ना कहीं
लो बता दिया ………
एक बोध हूँ ………शायद
क्या अब भी
ढूँढ सकोगे मुझे?

क्योंकि
अज्ञात की श्रेणी मे हूँ
………

18 टिप्‍पणियां:

RITU BANSAL ने कहा…

एक बोध हूँ ..
बहुत सुन्दर !
शिक्षक दिवस की शुभकामनायें !!

Unknown ने कहा…

soonya me bhi khoj lete hai log fir aapne to pahchan chipayee nahee , behtareen bhav liye shabdankan badhai

रश्मि प्रभा... ने कहा…

जो मिल जाए , जो ज्ञात हो जाए - वह मैं कहाँ !

वाणी गीत ने कहा…

अज्ञात की श्रेणी में स्वयं बोध !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बोध को ढूंढते ही रह गए .... प्रवाह मयी रचना

Kailash Sharma ने कहा…

काश इस अज्ञात का बोध हो जाता...बहुत सुन्दर रचना..

सदा ने कहा…

बेहद सशक्‍त भाव ... उत्‍कृष्‍ट लेखन के लिए आभार

mark rai ने कहा…

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बृहस्पतिवार (06-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ...!
अध्यापकदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

उपाधियाँ उतारते उतारते मुक्त हो जाना है।

Vinay ने कहा…

:)

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विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

शुभप्रभात !
अज्ञात की श्रेणी मे हूँ
इसलिए तो तुम में समाहित हूँ !

Master ने कहा…

bahut achhi line hai vandna ji.....

सुधाकल्प ने कहा…

बहुत ही सुन्दर व भाव पूर्ण कविता है|

सुधाकल्प ने कहा…

बहुत ही सुन्दर व भाव पूर्ण कविता है|

सुधाकल्प ने कहा…

बहुत ही सुन्दर व भाव पूर्ण कविता है|

Asha Joglekar ने कहा…

कहीं इसे आत्मबोध तो नही कहते । सुंदर प्रस्तुति ।

amit kumar srivastava ने कहा…

जीवन ही अज्ञात सा है | एकदम दार्शनिक सी रचना |