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मंगलवार, 28 सितंबर 2021

मुक्ति

                              छोड़ दें सब कुछ और कहीं गुम हो जाएं

ज़िन्दगी के पन्ने पर एक इबारत ये भी लिख जाएं

बहुत शोर है
बहुत शोर
अब तो खामोशी में भी
फिर किस सन्नाटे से आँख मिलाएं

मैंने मौन के अंधेरे ओढ़े हैं
मुझे रौशनियों से न बहलाओ

मैं एक रुके हुए समय की बुझती लौ हूँ
मेरी अंतिम साँस पर न पहरे लगाओ

जाने दो
मुक्त होने दो
मैंने मुक्ति के बीजमंत्र से लिखी हैं नयी ऋचाएं

1 टिप्पणी:

Anita ने कहा…

मुक्ति की तलाश में ही हर सवाल का जवाब है