वो कहते हैं इंसान कहीं खो गया
मगर मुझे तो अभी अभी मिला
अलमस्त,बदमस्त ,बेफिक्र सा
सारे जहाँ को दामन में लपेटे हुए
दुनिया को मुट्ठी में कैद करता हुआ
जनहु ऋषि सा ओक में पीता हुआ
गंगा को अपवित्र करता हुआ
अपने हाथ में भगवान पकडे हुए
ऊँगली के इशारे पर नचाता हुआ सा
मुझे तो इंसान अभी अभी मिला
एटम बम बनाता हुआ
संसार को दाढ़ों में चबाता हुआ
मानवता को मसलता हुआ
शैतान को मात करता हुआ
आगे बढ़ने की चाह में
अपनों के सिर कुचलता हुआ
मुझे तो इंसान अभी अभी मिला
जीने के नए मानक गढ़ता हुआ
पीर पैगम्बर से ना डरता हुआ
अमनोचैन को नेस्तनाबूद करता हुआ
खुद को खुदा समझता हुआ
मरे हुए को और मारता हुआ
मुझे तो इंसान अभी अभी मिला